
जानकारी के मुताबिक, साइबर ठगों ने डॉक्टर को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। इतना ही नहीं, आरोपियों ने वीडियो कॉल के जरिए फर्जी अदालत में पेशी कराई और CBI के नाम से फर्जी दस्तावेज भेजकर उन्हें डराया। लगातार निगरानी और दबाव बनाकर RTGS के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों में करीब 49 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
कैंसर पीड़ित पत्नी को भी कैमरे के सामने बैठाया
इस वारदात का सबसे संवेदनशील पहलू यह रहा कि ठगों ने डॉक्टर की कैंसर पीड़ित पत्नी को भी वीडियो कॉल के दौरान कैमरे के सामने बैठाए रखा। सात दिनों तक चले इस कथित डिजिटल अरेस्ट ने बुजुर्ग दंपति को मानसिक रूप से परेशान कर दिया।
साइबर अपराधियों का नया हथकंडा, बुजुर्ग भी निशाने पर
यह घटना एक बार फिर बताती है कि साइबर अपराधी अब सरकारी जांच एजेंसियों के नाम और फर्जी अदालती कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं।
सावधान रहें: पुलिस, CBI, IB या कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही जांच के नाम पर बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर कराने को कहती है।
साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
— National Today Media



