
हरिद्वार में करीब 55 वर्ष के एक बुजुर्ग हाथी की उपचार के दौरान मौत हो गई। वन विभाग की टीम ने हाथी की हालत बिगड़ने पर उसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। वन विभाग के अनुसार, छह नवंबर को भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, WWF के विशेषज्ञों, अनुभवी वन्यजीव पशु चिकित्सकों और वन विभाग की संयुक्त टीम ने हाथी को विशेषज्ञों की देखरेख में डार्ट किया था। इसके बाद उसकी स्थिति बिगड़ गई।
टीम ने उसे ऑक्सीजन, सीपीआर, रिवर्सल औषधि और नसों के जरिए तरल पदार्थ (IV फ्लूड) देने के साथ आपातकालीन उपचार उपलब्ध कराया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। स्वतंत्र पशु चिकित्सक विशेषज्ञ समिति की ओर से किए गए पोस्टमार्टम में हाथी की उम्र करीब 55 वर्ष आंकी गई। जांच में अत्यधिक वृद्धावस्था से जुड़ी हृदय संबंधी समस्याएं पाई गईं। इनमें मायोकार्डियल फाइब्रोसिस और कार्डियोमायोपैथी जैसे बदलाव शामिल थे। इन समस्याओं के कारण हाथी के लिए शारीरिक तनाव सहन करना मुश्किल हो गया था।



