पूरे फ्रांस में विरोध प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे आठ लाख लोग, 150 से अधिक पुलिसकर्मी घायल

फ्रांस में विरोध प्रदर्शन दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. स्कूलों की कमियों और महंगाई के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन ने अब हिंसा का रूप ले लिया है. कई शहरों में आगजनी की घटनाएं हुई हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में करीब 8 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतर आए हैं. 6 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. 200 से ज्यादा स्टूडेंट्स घायल हो चुके हैं. मगर विरोध रुकने का नाम नहीं ले रहा है.
फ्रांस 24 की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन के काफी करीब पहुंच गए. लिमोज शहर की 143 साल पुरानी इमारत में आग लगा दी गई. कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं. प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग ऐतिहासिक मूर्तियों पर चढ़ गए. लिली और मार्सिले में प्रदर्शनकारियों के सरकारी इमारतों में घुसने की खबरें भी सामने आईं. बीते एक महीने से फ्रांस में विरोध प्रदर्शन जारी है.
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें?
प्रदर्शनकारियों की मांगें सिर्फ स्कूलों की समस्याओं तक सीमित नहीं हैं. वे वेतन और पेंशन बढ़ाने, महंगाई पर काबू पाने और सरकारी सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग भी कर रहे हैं. वहीं, छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठा रहे हैं.
छात्रों की सबसे बड़ी शिकायत स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर है. कई स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं. वहीं, शिक्षकों के लंबे समय तक गैरहाजिर रहने पर उनकी जगह दूसरे शिक्षक नहीं आते. इससे पढ़ाई पर असर पड़ता है और कई बार जरूरी विषयों की क्लास तक रद्द करनी पड़ती हैं.
इसके अलावा, छात्रों ने भरी हुई क्लास, पीने के पानी की कमी, भीषण गर्मी और खराब स्कूल बिल्डिंग की समस्या भी उठाई है. लंबे स्कूल शेड्यूल को लेकर भी नाराजगी है. कुछ स्कूलों में छात्रों को सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक पढ़ाई करनी पड़ती है. प्रदर्शनकारी इन समस्याओं को दूर करने और स्कूलों में बेहतर सुविधाएं देने की मांग कर रहे हैं.
स्कूल से शुरू हुआ प्रदर्शन देशभर में फैला
फ्रांस में इस आंदोलन की शुरुआत 17 सितंबर को पेरिस के पास क्रेतै (Créteil) के एंटोनी डी सेंट-एक्जुपेरी हाईस्कूल से हुई. यहां शिक्षक स्टाफ और संसाधनों की कमी के खिलाफ हड़ताल कर रहे थे. उनके समर्थन में छात्र भी प्रदर्शन करने लगे. 29 सितंबर को प्रशासन ने स्कूल में अतिरिक्त स्टाफ, डिप्टी प्रिंसिपल और नर्स देने पर सहमति जताई, जिसके बाद हड़ताल खत्म हो गई. हालांकि, तब तक विरोध दूसरे इलाकों में फैल चुका था. महज 8 दिनों में आंदोलन 410 स्कूलों तक पहुंच गया. इसके बाद विश्वविद्यालयों के छात्र भी इसमें शामिल हो गए. छात्रों को उनके माता-पिता, शिक्षकों और मजदूर संगठनों का समर्थन भी मिलने लगा.
5 अक्टूबर को उत्तरी फ्रांस के लेंस शहर में प्रदर्शन के दौरान पुलिस के एक ग्रेनेड से 15 साल के लड़के का हाथ बुरी तरह घायल हो गया. चोट इतनी गंभीर थी कि उसका हाथ काटना पड़ा. इस घटना ने पुलिस की सख्त कार्रवाई के खिलाफ लोगों का गुस्सा और बढ़ा दिया. आंदोलन के दौरान देशभर में हुई झड़पों में अब तक 200 से ज्यादा छात्र, स्कूलों के 85 कर्मचारी और 700 पुलिसकर्मी घायल हो चुके हैं. इस तरह स्कूलों में स्टाफ और संसाधनों की कमी के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन धीरे-धीरे बड़े आंदोलन में बदल गया.
क्यों नहीं थम रहा विरोध प्रदर्शन?
- महंगाई और वेतन का मुद्दा: प्रदर्शनकारी वेतन और पेंशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि महंगाई के कारण लोगों पर खर्च का बोझ बढ़ रहा है और उनकी कमाई से घर चलाना मुश्किल हो रहा है.
- स्कूलों की खराब व्यवस्था: कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जर्जर बिल्डिंग और जरूरी सुविधाओं का अभाव है. इससे छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है और वे बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं.
- पुलिस कार्रवाई से गुस्सा: 5 अक्टूबर को लेंस में पुलिस के ग्रेनेड से 15 साल के छात्र का हाथ बुरी तरह घायल हो गया, जिसे बाद में काटना पड़ा. इस घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ लोगों की नाराजगी और बढ़ गई.
- मांगें पूरी नहीं होने से नाराजगी: एक स्कूल में अतिरिक्त स्टाफ देने जैसे कदम उठाए गए, लेकिन प्रदर्शनकारियों की सभी मांगें पूरी नहीं हुईं. इससे नाराजगी बनी रही और आंदोलन दूसरे इलाकों में भी फैलता गया.



