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पेट्रोल और डीजल को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, विंडफॉल टैक्स बढ़ा

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध का सीधा असर अब वैश्विक ईंधन बाजार और अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन के बुरी तरह बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भयंकर आग लग गई है। ब्रेंट क्रूड एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर के पास पहुंच चुका है।

वहीं, कच्चे तेल में आई इस जबरदस्त तेजी के बीच भारत सरकार ने भी पेट्रोलियम कंपनियों पर अपना शिकंजा कसते हुए पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर ‘विंडफॉल टैक्स’ (Windfall Tax) बढ़ा दिया है।

पेट्रोल-डीजल पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का फायदा उठाकर तेल कंपनियां अनाप-शनाप मुनाफा न कमाएं और घरेलू बाजार में तेल की पर्याप्त सप्लाई बनी रहे, इसके लिए सरकार ने 1 सितंबर 2026 से विंडफॉल टैक्स (Special Additional Excise Duty – SAED) में बड़े बदलाव किए हैं।

सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स को 0 रुपये से बढ़ाकर 1.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में 1 रुपये का इजाफा किया गया है। अब यह 24 रुपये से बढ़कर 25 रुपये प्रति लीटर हो गया है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF – विमान ईंधन) के निर्यात पर लगने वाले टैक्स में 50 पैसे की कटौती की गई है, जिससे यह 19.50 रुपये से घटकर 19 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि विंडफॉल टैक्स का असर केवल कंपनियों द्वारा किए जाने वाले ‘निर्यात’ (Export) पर पड़ता है। देश के भीतर पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel) की खुदरा कीमतों (Retail Prices) में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है।

कच्चे तेल में क्यों लगी है आग?

कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तूफानी तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल-ईस्ट (पश्चिम एशिया) का भयंकर संकट है। इस भीषण संघर्ष की वजह से दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापारिक मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है। इराक, कुवैत और यूएई जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों की शिपिंग क्षमता प्रभावित हुई है। भंडारण टैंक फुल होने के कारण इन देशों को अपना उत्पादन घटाना पड़ा है, जिसके चलते बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई अचानक से घट गई है।

सप्लाई कम होने और तनाव के और भी ज्यादा भड़कने की आशंका में ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) और WTI दोनों ही 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को छू सकता है।

आगे क्या होगा असर?

अगर खाड़ी देशों में हालात जल्दी नहीं सुधरे और कच्चा तेल 100 डॉलर के पार पहुंच गया, तो पूरी दुनिया में महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है।

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