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कर्जदाता बोले, ‘परिवार से जुड़ी संस्थाओं ने अपने वोट के जरिए सुभाष चंद्रा को दिलाई रिलीफ’

नई दिल्ली। मीडिया दिग्गज सुभाष चंद्र की व्यक्तिगत दिवालिया योजना से असहमति जताने वाले कर्जदाताओं ने आरोप लगाया है कि चंद्रा के परिवार से जुड़ी पांच कंपनियों के पास कर्जदाताओं की समिति में 61.78 प्रतिशत मतदान अधिकार थे और इन कंपनियों ने उनकी व्यक्तिगत दिवालिया समाधान योजना को मंजूरी दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

इस समाधान योजना में करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत कर्ज दावों के मुकाबले सिर्फ 6.5 करोड़ रुपये भुगतान करने का प्रस्ताव है।

चंद्रा के परिवार से जुड़ी कंपनियां हैं- वीणा इंवेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, डायरेक्ट मीडिया डिस्ट्रीब्यूशन वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, वर्ल्ड क्रेस्ट एडवाइजर्स एलएलपी, लेमोनेड कैपिटल एडवाइजर्स एलएलपी और कार्पकाल कैपिटल एडवाइजर्स एलएलपी।

एचडीएफसी बैंक और आईडीबीआई ट्रस्टीशिप सर्विसेज समेत कर्जदाता बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों ने एनसीएलटी में दलील दी कि इन पांचों कंपनियों को योजना पर मतदान की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी।

उनका तर्क था कि पांचों कंपनियां इनसाल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत ‘एसोसिएट्स’ की परिभाषा में आती हैं। एचडीएफसी बैंक का कुल दावे में 3.2 प्रतिशत हिस्सा है। बैंक ने कहा है कि वह एनसीएलटी के आदेश के विरुद्ध अपील करने पर विचार कर रहा है। केनरा बैंक ने भी अपील दाखिल करने की बात कही है।

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