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गाजियाबाद आबकारी विभाग पर शासन का बड़ा एक्शन: DEO संजय सिंह समेत तीन निलंबित, अब शराब कंपनियों की दुकानों पर उठे सवाल!

नाइट क्लबों में बिना लाइसेंस शराब परोसने और दूसरे राज्यों की शराब की बिक्री के मामले में कार्रवाई, चड्ढा कंपनी और सोनू गोयल कंपनी की दुकानों पर कथित ओवररेटिंग और कालाबाजारी की जांच की उठी मांग

गाजियाबाद। जिले के आबकारी विभाग में लंबे समय से चल रही अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के मामलों पर आखिरकार शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला आबकारी अधिकारी संजय सिंह सहित तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। निलंबित अधिकारियों में आबकारी निरीक्षक चमन सिंह और अखिलेश भी शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि नाइट क्लबों, बार और रेस्टोरेंट में बिना वैध बार लाइसेंस शराब परोसने तथा दूसरे राज्यों के लिए निर्धारित शराब की अवैध बिक्री के मामलों को कार्रवाई का प्रमुख आधार बनाया गया है। शासन की इस कार्रवाई को आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल के रूप में देखा जा रहा है।

तीन अधिकारियों पर कार्रवाई, लेकिन असली जांच अभी बाकी!

इस कार्रवाई के बाद अब जिले में शराब कारोबार से जुड़ी दूसरी शिकायतें भी चर्चा में हैं। खासतौर पर चड्ढा कंपनी और सोनू गोयल कंपनी से जुड़ी शराब की दुकानों पर कथित ओवररेटिंग और नियमों के उल्लंघन के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है।
स्थानीय स्तर पर लगातार ऐसी शिकायतें सामने आने का दावा किया जा रहा है कि कुछ दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक रकम वसूली जाती है। वहीं, दुकानों के बंद होने के बाद भी अवैध रूप से शराब की बिक्री किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक जांच होना जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।

दिन में ओवररेटिंग, रात में कथित अवैध बिक्री के आरोप

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नाइट क्लबों में बिना लाइसेंस शराब परोसने के मामले में तीन अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है, तो शराब की दुकानों से जुड़ी ओवररेटिंग और कालाबाजारी की शिकायतों की जांच क्यों नहीं कराई जाती?
क्या संबंधित कंपनियों की दुकानों पर नियमों का पालन हो रहा है? क्या प्रत्येक दुकान पर निर्धारित रेट लिस्ट के अनुसार ही शराब बेची जा रही है? और यदि रात में अवैध बिक्री की शिकायतें सही हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इन सवालों का जवाब आबकारी विभाग और शासन को देना चाहिए।

अब कंपनियों की भूमिका की भी हो निष्पक्ष जांच

जानकारों और शिकायतकर्ताओं की मांग है कि जांच केवल निलंबित अधिकारियों तक सीमित न रहे, बल्कि शराब कारोबार से जुड़े लाइसेंसधारकों, कंपनियों और संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी गहराई से पड़ताल की जाए।
यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हुई तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित अनियमितताएं केवल विभागीय लापरवाही का परिणाम थीं या इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था।
अब गाजियाबाद की जनता की निगाहें शासन और आबकारी विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल साफ है—क्या तीन अधिकारियों के निलंबन के बाद जांच की आंच शराब कारोबार से जुड़ी बड़ी कंपनियों तक भी पहुंचेगी, या फिर यह कार्रवाई यहीं तक सीमित रह जाएगी?

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