बीटेक पास चपरासी ने किया करोड़ाें का खेल, पासवर्ड चुराकर FD साफ की; ग्रेटर नोएडा PNB स्कैम में बड़ा खुलासा

ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सेक्टर पाई शाखा में करोड़ों रुपए की कथित हेराफेरी के मामले में सीबीआई ने मुख्य आरोपी दीपांशी को गिरफ्तार किया है। वह बैंक में चपरासी के पद पर तैनात थी और BTech पास है। आरोप है कि उसने बैंक के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर ग्राहकों के खातों से रकम निकालकर दूसरे खातों में ट्रांसफर की। इस मामले में सीबीआई ने आशुतोष पाठक को भी गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आया है कि दीपांशी बैंक के दूसरे कर्मचारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल करती थी। इसके जरिए ग्राहकों के खातों से रकम निकालकर अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती थी। खासतौर पर उन लोगों के खाते निशाने पर थे, जिन्हें जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजा मिला था।
खाताधारकों को अपना मोबाइल नंबर देती थी
हेराफेरी का तरीका भी चौंकाने वाला था। आरोप है कि दीपांशी ने खाताधारकों को अपना पर्सनल मोबाइल नंबर दे रखा था। जब कोई ग्राहक अपने खाते की जानकारी लेने बैंक पहुंचता तो वह बाहर जाकर उससे मिलती थी। इसके बाद किसी न किसी बहाने उसे बैंक के अंदर जाने से रोक देती थी। इससे ग्राहकों को अपने खातों में हो रही गड़बड़ी की जानकारी नहीं मिल पाती थी।
कई अन्य लोगों के नाम भी जांच में आए
सीबीआई की जांच में प्रदीप, मेम्वती देवी और प्रियंका कुमारी के नाम भी सामने आए हैं। ये सभी साकीपुर के रहने वाले बताए जा रहे हैं। वहीं, आशुतोष पाठक और सरोज एक्षर गांव के निवासी हैं। दोनों दीपांशी के परिचित बताए गए हैं। शालिनी मंडी श्याम नगर की रहने वाली है।
फिलहाल सीबीआई बैंक कर्मचारियों की भूमिका, यूजर आईडी और पासवर्ड के इस्तेमाल, संदिग्ध बैंक खातों और मोबाइल नंबर व ईमेल में बदलाव की जांच कर रही है। खाताधारकों ने मांग की है कि मामले में शामिल सभी बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका उजागर की जाए, ताकि हेराफेरी में शामिल अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सके।
अब पढ़िए, मामला कैसे सामने आया
ऐच्छर गांव में रहने वाले ट्रांसपोर्टर विनीत भाटी मंगलवार को बैंक की सेक्टर-पाई-1 में पीएनबी शाखा गए। विनीत जय शिव ट्रांसपोर्ट नाम से फर्म चलाते हैं। बैंक में उनका करंट अकाउंट है।
उन्होंने बताया- म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए बैंक कर्मचारियों से संपर्क किया था। ब्रांच मैनेजर के कहने पर मैंने चेक और संबंधित ब्रोशर पर हस्ताक्षर किए थे।
इसके बाद फंड के 25 लाख रुपए मेरे सेविंग अकाउंट में ट्रांसफर करने की बजाय किसी दूसरे खाते में भेज दिए गए। यह खाता भी विनीत भाटी के नाम पर बताया गया, लेकिन यह मेरा खाता नहीं था।
इसके बाद उन्होंने बीटा-2 कोतवाली में शिकायत देकर बैंक कर्मचारियों की जांच करने और 25 लाख रुपए वापस दिलाने की मांग की।
इस दौरान बैंक में मौजूद 5-6 खाताधारकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। इसके बाद कई खातों से रकम गायब होने का खुलासा हुआ।
मुआवजे में मिले 1.29 करोड़, एक करोड़ से ज्यादा गायब
बृजेश ने बताया- नोएडा एयरपोर्ट के लिए मेरी मां की जमीन अधिग्रहीत की गई थी। इसके बदले उनके खाते में करीब 1 करोड़ 29 लाख रुपए का मुआवजा आया था।
परिवार ने इसमें से केवल 15 लाख रुपए ही निकाले थे। अब उनके खाते से एक करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम गायब है। बैलेंस जीरो दिखाई दे रहा है।
पैसे निकालने के नाम पर केवाईसी मांगते थे
बुजुर्ग धर्मवीर ने बताया- मेरे 17.5 लाख रुपए थे। बैंक ने 2 साल से मुझे कोई एंट्री भी नहीं करने दी। मेरे साथ बहुत धोखाधड़ी की। कभी खाता बंद कर देते हैं, कभी पैन कार्ड खराब बता देते हैं। कभी आधार कार्ड की केवाईसी कराने के लिए बोलते थे।
मैं कल बैंक आया। मैनेजर ने दिखाया कि खाते में कुछ नहीं है। दादी का भी इसी बैंक में खाता है। उसमें 61 लाख हैं, वे पता नहीं होंगे भी या नहीं। सवा 2 लाख की मेरी एफडी भी है।
बैंक अकाउंट खाली, अब क्या करें
बैंक के बाहर बहन के साथ बैठी बुजुर्ग महिला संतोष ने बताया- मेरा 1 करोड़ 29 लाख रुपया आया था। मेरी बहन का भी इतना ही मुआवजा आया था।
उसमें से कुछ रुपए निकाल लिए थे, बाकी रह गए। अब हमारा 1 करोड़ 18 लाख गायब है। जीरो बैलेंस दिखा रहा है। ये बैंक वाले कुछ बता भी नहीं रहे हैं। हम पूछ रहे तो बोले रहे हैं कि हम तो नए आए हैं।
मेरा घर बन रहा है, बच्चे किराए पर रह रहे हैं। बेटी बीमार थी। पति के रिटायर होने पर 32 लाख रुपए मिले थे, वो उसके इलाज में लग गए। बेटी की भी मौत हो गई। अब हमारे पास एक भी पैसा भी बचा है। हम पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं।
बैंक की मैडम बोलीं- हमारी नौकरी चली जाएगी, अब मत आना
संतोष की बहन सरोज ने बताया- मुआवजे में हमें 1 करोड़ 29 लाख रुपए मिले थे। उनमें से हमने 10 लाख कैश निकाले थे, 20 लाख ट्रांसफर करवाए थे। बैंक में और रुपए निकालने के लिए कहा, तो मैडम कहने लगीं कि इतने नहीं होंगे, करवा लेना। फिर हम बाद में आए, तो कहा कि मोटी रकम चाहिए तो 2 दिन पहले बता देना, हम तब दे पाएंगे।
कई खाताधारकों की रकम गायब
श्रीचंद ने बताया- बैंक में हमारी 1.16 करोड़ रुपए की एफडी थी। यह रकम गबन कर ली गई। बिरौंडी चक्रसेनपुर और आसपास के कई खाताधारकों के साथ भी ऐसी ही धोखाधड़ी हुई है।
करतारी नाम के व्यक्ति की 2 एफडी से 9.87 लाख और 6.89 लाख रुपए, अमीचंद की एफडी से 10.34 लाख की हेराफेरी हुई है। विजयपाल के खाते से एक करोड़ से अधिक, सुभाष के खाते से एक करोड़ से अधिक और संतोष के खाते से करीब 1.18 करोड़ की रकम गायब हुई है।
बिजेंद्र सिंह के खाते से 88 लाख रुपए और एफडी से 25 लाख रुपए, रणपाल के खाते से करीब 90.43 लाख की हेराफेरी हुई है। जबकि हनीफ खान के खाते से करीब 40 लाख, सोनू के खाते से करीब 1.07 करोड़, जगदीश की एफडी से 23 लाख और सुनीता की एफडी से 80 लाख रुपए गायब हैं।


