
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की ओर से दर्ज कराए गए उत्पीड़न और धोखाधड़ी के मुकदमे में आरोपी पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। मामले में एसआईटी ने कोर्ट से गिरधारी साहू का गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) हासिल कर लिया है। लगातार फरार चल रहे साहू की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अब जल्द ही उस पर इनाम भी घोषित करेगी।
देहरादून की कैंट कोतवाली में बीते 15 अक्तूबर को केस दर्ज होने के बाद से ही गिरधारी साहू मोबाइल बंद कर लापता है। एसआईटी की टीमें बरेली समेत कई संभावित ठिकानों पर उसकी तलाश कर चुकी हैं। लेकिन उसका सुराग नहीं लगा।
देश छोड़ने की आशंका, इनाम घोषित होगा
उसके भारत से भागकर नेपाल पहुंचने की भी आशंका है। इससे पूर्व कोर्ट से उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। अब कोर्ट से गैर जमानती वारंट मिलने के बाद एसआईटी उस पर इनाम घोषित कराने की प्रक्रिया शुरू कर रही है।
फर्जीवाड़े और हत्या की साजिश का है आरोप
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने पति गिरधारी लाल साहू (निवासी जोगी नवादा, बरेली, उप्र) के खिलाफ धोखाधड़ी, मारपीट, आपराधिक षड्यंत्र और एससी-एसटी एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।
तहरीर में पहली शादी छिपाकर विवाह करने, सरकारी आवास में स्टाफ के सामने जातिसूचक शब्द कहने, फर्जी हस्ताक्षर से कंपनियों के निदेशक पद से हटाने और एक ऑडियो में महिला से बात करते हुए हत्या की साजिश रचने का आरोप है।
हाईकोर्ट ने खारिज की गिरधारी लाल साहू की याचिका
नैनीताल । हाईकोर्ट ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी द्वारा दायर की गई रिट याचिका को खारिज कर दिया है| याचिका में थाना केदार/कैंट, जिला देहरादून में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी।
मामले में रेखा आर्य ने गिरधारी साहू पर आईपीसी की धाराओं 120-बी, 323, 420, 467, 468, 471, 495, 498-ए, 504, 506 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1) के तहत गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। याची के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी थी कि दोनों की शादी 06 जुलाई 2004 को हुई थी और लगभग 22 वर्षों से वे साथ रह रहे हैं, इसलिए यह केवल घरेलू विवाद का मामला है जिसे अब आपराधिक रंग दिया जा रहा है।न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने बीते दिनों दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।
बुधवार को कोर्ट ने स्पष्ट किया, कि इस मामले के आरोप केवल सामान्य वैवाहिक मनमुटाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें शारीरिक प्रताड़ना, दस्तावेजों की कूट रचना, जातिसूचक अपमान और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर संज्ञेय अपराध प्रथम दृष्टया शामिल हैं। अदालत ने कहा कि 22 साल का पुराना रिश्ता होने मात्र से बाद में होने वाले अपराधों या क्रूरता की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता और ऑडियो रिकॉर्डिंग व फर्जी दस्तावेजों की सत्यता जांच तथा विचारण का विषय है। सुप्रीम कोर्ट के भजलाल और निहारिका इन्फ्रास्ट्रक्चर मामलों के सिद्धांतों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर अदालत मिनी-ट्रायल नहीं कर सकती, अतः एफआईआर को रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता और यह रिट याचिका खारिज की जाती है।


