नोएडा एयरपोर्ट के पास 2 हजार हेक्टेयर में बनेगी सिविल एविएशन इंडस्ट्री, कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियां भी होंगी

ग्रेटर नोएडा : उत्तर प्रदेश लगातार विकास की ऊंचाइयां छू रहा है. जहां निगाह डालो वहीं कुछ न कुछ निर्माण हो रहा है. कभी कोई एक्सप्रेसवे बनकर खड़ा हो जाता है तो कभी कोई हाईवे. यहां तक कि सबसे बड़ी उपलब्धि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है. अब बस इसी जेवर एयरपोर्ट के पास में एक और बड़ा काम होने जा रहा है. दरअसल, यमुना सिटी के दो हजार हेक्टेयर जमीन पर सिविल एविएशन इंडस्ट्री लगेगी. इस जमीन का लैंडयूज इसके अनुरूप कर दिया गया है. यहां पर देश-विदेश की सिविल एविशन सेक्टर की बड़ी कंपनियों को लाने की तैयारी है.
नोएडा एयरपोर्ट 15 जून को लोगों के लिए खोल दिया गया था. तभी से कई उड़ानें रफ्तार भर रही हैं. बता दें, यमुना अथॉरिटी एरिया में नोएडा एयरपोर्ट प्रॉजेक्ट के लिए तीन चरणों में करीच पांच हजार हेक्टेयर जमीन खरीदी जा रही है. दो चरणों में 1334 और 1365 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हो चुका है. तीसरे चरण में 2053 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण चल रहा है. यह भी पूरा होने के करीब है.
पहले चरण में अधिग्रहीत की गई जमीन पर बीते 15 जून से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन शुरू हो गया है. एक रनवे के साथ यह संचालन चल रहा है. यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ ही इस फेज में एक और रनवे बनाया जाएगा. दूसरे और तीसरे चरण में खरीदी गई जमीन पर यात्री सुविधाओं के साथ मेटीनेंस रिपेयरिंग एंड ओवरहालिंग (एमआरओ) हब विकसित किया जाएगा. नोएडा एयरपोर्ट के नोडल अफसर शैलेंद्र भाटिया ने कहा कि दो हजार हेक्टेयर जमीन का मास्टर प्लान सिविल एविएशन हव के लिए तय कर दिया गया है. इस जमीन पर सिविल एविएशन से संबंधित गतिविधियां हो सकेंगी.
विमानों की मरम्मत होगी तो उसके कलपुर्जे की जरूरत पड़ेगी. इसलिए विमानों के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों को भी लाने की जरूरत पड़ेगी. इसको देखते हुए यमुना अथॉरिटी ने एयरपोर्ट प्रॉजेक्ट के साथ लगती करीब दो हजार हेक्टेयर जमीन सिविल एविएशन हब के लिए आरक्षित की है. 2041 के मास्टर प्लान में भी इसका प्रावधान कर दिया गया है. इस हब में देश-दुनिया के बड़ी कपनियों को लाने की प्लानिंग है. ताकि नोएडा एयरपोर्ट के पास विमानों के संचालन से लेकर मरम्मत तक का काम हो सके.



