बस में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म का मामला: 26 दिन तक दबा रहा सच, दिल्ली पुलिस की थ्योरी पर उठे सवाल

ग्रेटर नोएडा: 16 वर्षीय छात्रा के साथ स्लीपर बस में गैंगरेप के आरोपों ने ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर रात के समय यात्री सुरक्षा और बसों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रा परी चौक से बस में सवार हुई या उससे पहले किसी अन्य स्थान से यहां पहुंची, इसकी जांच बीटा-2 थाना पुलिस कर रही है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का दावा है कि दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस घटना के संबंध में संपर्क नहीं किया है।
ग्रेटर नोएडा पुलिस ने अपनी जांच शुरू करते हुए आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर छात्रा रात में अकेली परी चौक पहुंची थी तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षा व्यवस्था की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी।
जीरो पॉइंट से परी चौक तक कैसे पहुंची
पुलिस सूत्रों के अनुसार आशंका है कि छात्रा यमुना एक्सप्रेसवे पर किसी बस से उतरकर जीरो पॉइंट पहुंची होगी। इसके बाद वह नोएडा सेक्टर-62 जाने के लिए सवारी का इंतजार करते हुए परी चौक पहुंची हो सकती है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वह किस रास्ते से परी चौक पहुंची और वहां कितनी देर रही। यदि वह जीरो पॉइंट से परी चौक तक पहुंची थी तो रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों में उसकी गतिविधियां कैद होने की संभावना है। ऐसे में जांच का अहम सवाल यह भी है कि छात्रा को रास्ते में किसी पुलिसकर्मी ने क्यों नहीं रोका या उससे पूछताछ क्यों नहीं की।
स्लीपर बसे सवारी भरती है, रोकने वाला कोई नहीं
परी चौक और कसाना क्षेत्र के आसपास स्लीपर बसों के खड़े होकर सवारी भरने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। कई बसें यहां यात्रियों को बैठाने के लिए रुकती है। यहां तक कि ऑनलाइन बुकिंग कर सवारी इनमें बैठती हैं। इसके अलावा अलग-अलग रूट पर चलने वाले ऐसे वाहन भी है, जिनकी नियमित जांच को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि रात में परी चौक पर सवारी भरने वाली बसों की चेकिंग कौन करता है।
पूर्वांचल और बिहार तक जाती हैं बसें
इनमें से कई बसों का संचालन दिल्ली के कश्मीरी गेट और आनंद विहार से भी होता है। एक्सप्रेस वे के रास्ते ये बसें पूर्वाचल के विभिन्न जिलों और बिहार तक जाती हैं। आरोप है कि कई बसों में काले शीशे और पर्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में बस के अंदर में होने वाली गतिविधियों पर निगरानी मुश्किल हो जाती है। जिस बस में नाबालिग के साथ हैवानियत की घटना हुई, बताया जा रहा है कि उसमें टिंटेड ग्लास और परदे लगे थे। जिससे अंदर की गतिविधि दिखाई नहीं दी।
समय-समय पर इन बसों पर कार्रवाई की जाती है। डग्गामार बसों पर जुलाई में चले विशेष अभियान में 188 चालान और 117 वाहन बंद किए गए थे।
उदित नारायण, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, प्रवर्तन
ड्राइवर और कंडक्टर के सत्यापन पर सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल बस के ड्राइवर और कंडक्टर के सत्यापन को लेकर है। ऑनलाइन बुकिंग और जीपीएस जैसी सुविधाओं वाली बस में यात्रियों की सुरक्षा के लिए चालक और परिचालक का पुलिस वेरिफिकेशन होना कितना जरूरी है, यह घटना फिर सामने ले आई है। अगर नियमित रूप से ड्राइवर कंडक्टर का सत्यापन और बसों की जांच होती तो क्या ऐसी घटना को रोका जा सकता था।
ट्रैवल कंपनी ने ऑफिस बंद कर होर्डिंग हटाया
जिस स्लीपर बस में 11वीं की छात्रा से गैंगरेप हुआ था, उस ट्रैवेल्स कंपनी का ऑफिस नोएडा सेक्टर 44 छलेरा में स्थित है। मामला तूल पकड़ा तो ट्रैवेल्स कंपनी ने अपना ऑफिस बंद कर दिया है। दफ्तर के बाहर लगे होर्डिंग को भी हटा दिया है। जानकारी के मुताबिक, वह बस इस ऑफिस से होते हुए भी जाती थी। हालांकि, घटना वाले दिन बस सेक्टर-44 नहीं पहुंची। इसी ऑफिस से पूरे दिल्ली एनसीआर में ट्रैवल कंपनी अपने बसों की देखरेख कर रही थी।
पर्दे और ब्लैक शीशे बने सुरक्षा में रोड़ा
स्लीपर बसों में लगे पर्दे और कई वाहनों में गहरे शीशे बाहर से अंदर की गतिविधियां देखने में बाधा बनते हैं। यही वजह है कि सवाल उठ रहा है कि ऐसी बसों में सुरक्षा मानकों की जांच क्यों नहीं होती।



