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ग्रेटर नोएडा में घर का सपना होगा पूरा, प्राधिकरण ने बोर्ड बैठक में लिए श्रमिकों के लिए 3 बड़े फैसले

दिल्ली-एनसीआर में खुद का घर खरीदने का सपना देखने वाले कम आय वाले परिवारों के लिए अच्छी खबर है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और कम आय वाले लोगों के लिए ग्रेटर नोएडा में किफायती बहुमंजिला फ्लैट बनाए जाएंगे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड ने इन आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही बाहर से रोजगार की तलाश में आने वाले श्रमिकों के लिए अस्थायी आवास बनाने की प्लानिंग को भी हरी झंडी मिल गई है।

अधिकारियों के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के पतवाड़ी गांव में करीब 44,750 वर्गमीटर और ईस्ट क्षेत्र के बिरौंदी गांव के पास करीब 18 हजार वर्गमीटर जमीन चिह्नित की गई है। इन दोनों जगहों पर करीब 30 से 40 वर्गमीटर आकार के किफायती फ्लैट बनाए जाएंगे। प्रस्तावित परियोजनाओं में करीब 4,000 से 5,000 फ्लैट बनाए जाने की संभावना है। सोसाइटी कितनी मंजिल की होगी, इसका विस्तृत प्लान बाद में तैयार किया जाएगा। फ्लैटों में लिफ्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा जाएगा।

रोजमर्रा की जरूरतों का भी रखा जाएगा ध्यान

किफायती आवासीय सोसाइटी में रहने वाले लोगों को रोजमर्रा की सुविधाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। यहां दूध और सब्जी बूथ के साथ दैनिक जरूरतों का सामान बेचने वाली दुकानों के निर्माण का भी प्रावधान होगा। इससे कम आय वाले परिवारों को एक ही परिसर में जरूरी सुविधाएं मिल सकेंगी।

बिल्डर फ्लैट महंगे, इसलिए बढ़ी किफायती घरों की जरूरत

ग्रेटर नोएडा एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रमिक रोजगार की तलाश में आते हैं। लंबे समय तक किराये पर रहने के बाद इनमें से कई लोग अपना घर खरीदना चाहते हैं, लेकिन प्राइवेट बिल्डरों के फ्लैट उनकी आय के मुकाबले काफी महंगे पड़ते हैं। इसी समस्या को देखते हुए किफायती आवास की योजना पर काम शुरू किया गया। बीते अप्रैल में हुए श्रमिक आंदोलन के बाद इस दिशा में प्रक्रिया तेज हुई और शासन स्तर से भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

श्रमिकों के लिए बनेंगे अस्थायी आश्रयस्थल

ग्रेटर नोएडा आने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए तत्काल रहने की सुविधा भी विकसित की जाएगी। इसके लिए इकोटेक-6 और इकोटेक-11 में 3,000-3,000 वर्गमीटर जमीन चिह्नित की गई है। प्राधिकरण इन भूखंडों को श्रम विभाग को निशुल्क ट्रांसफर करेगा। इसके बाद उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ट्रांजिट हॉस्टल योजना के तहत श्रम विभाग यहां श्रमिक आश्रयस्थलों का निर्माण करेगा। इससे शहर में आने वाले श्रमिकों को महंगे होटल या अस्थायी ठिकानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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