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पंतनगर में किसान मेले का सीएम धामी ने किया शुभारंभ, गिनाई सरकार की उपलब्धियां

पंतनगर। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जीबी पंत विश्वविद्यालय में शनिवार को 119वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। सीएम धामी ने कहा कि 2047 का जो ‘विकसित भारत’ का संकल्प है, उसे पूरा करने में किसान भाइयों की निर्णायक भूमिका रहेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धानी ने कहा कि हमारे किसान भाई अन्नदाता होने के साथ ही हमारे नायक भी हैं जो लोगों को अन्न उपलब्ध कराने का कार्य करते हैं। आज देशभर के किसानों को किसान सम्मान निधि के माध्यम से आर्थिक सहायता मिल रही है। किसान सम्मान निधि के अंतर्गत उत्तराखंड के 9 लाख किसानों को भी सीधे उनके बैंक खाते में यह सम्मान राशि प्राप्त हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य प्रदान किया जा रहा है।

सीएम धामी ने कहा कि किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, खर-पतवार से होने वाले नुकसान हेतु भी सुरक्षा कवच प्रदान किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से हमारी सरकार भी किसानों की समृद्धि के लिए निरंतर कार्य कर रही है। किसानों को तीन लाख रुपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि उपकरण खरीदने के लिए फार्म मशीनरी योजना के माध्यम से सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए 1,200 करोड़ रुपए की लागत से सेब, कीवी, ड्रैगन फ्रूट तथा स्टेट मिलेट मिशन की शुरुआत की है। प्रदेश में बागवानी को प्रोत्साहित करने के लिए 80 प्रतिशत सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है। शहद उत्पादन में हमारा राज्य देश में आठवें स्थान पर पहुंच गया है। हमारे राज्य में मधुमक्खी पालन की अपार संभावनाएं हैं।

बता दें कि 119वां अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का आयोजन 16 मार्च तक चलेगा और इसका विषय ‘सशक्त महिला-समृद्ध खेती’ रखा गया है। मेले में किसानों को उन्नत बीज, नवीनतम कृषि नवाचारों और मिलेट्स की खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारी मिलेगी।

मेले में उन्नत धान, बागवानी और सब्जियों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। कृषि अनुसंधान से जुड़े नवीनतम नवाचारों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इस बार विश्वविद्यालय ने मिलेट्स पर विशेष जोर दिया है। कोदो, झिंगोरा और मंडुआ जैसी पारंपरिक फसलों की बढ़ती महत्ता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इन फसलों की संभावित उच्च बाजार कीमतों को देखते हुए वैज्ञानिकों की ओर से विकसित तकनीकी जानकारी किसानों तक पहुंचाई जाएगी।

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