उत्तर प्रदेशराज्‍य

भर्ती परीक्षाओं के अंक गोपनीय नहीं, RTI से मिल सकती है जानकारी; हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में प्राप्त अंक गोपनीय जानकारी नहीं माने जा सकते. अदालत के अनुसार, यदि परीक्षा में शामिल कोई अभ्यर्थी आरटीआई के तहत दूसरे अभ्यर्थियों के अंक मांगता है, तो इसके लिए तीसरे पक्ष की सहमति की आवश्यकता नहीं है. न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि ये अंक निजी गोपनीय जानकारी की श्रेणी में नहीं आते. कोर्ट ने माना कि सार्वजनिक परीक्षा में प्राप्त अंक एक सार्वजनिक गतिविधि का हिस्सा हैं.

रेलवे विधि सहायक परीक्षा का मामला: यह मामला रेलवे में विधि सहायक पद के लिए हुई एक पुरानी परीक्षा से जुड़ा हुआ था. वर्ष 2008 में एक अभ्यर्थी ने सूचना का अधिकार कानून के तहत अपने और दो अन्य प्रतिस्पर्धियों के अंक तथा उत्तर पुस्तिकाओं की जानकारी मांगी थी. हालांकि विभाग ने शुरुआत में अंक उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया था, लेकिन उत्तर पुस्तिकाओं के अवलोकन की अनुमति दी थी. इसके बाद मामला केंद्रीय सूचना आयोग पहुंचा, जहां आयोग ने उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां देने का निर्देश दिया.

हाईकोर्ट की निजता पर टिप्पणी: वाराणसी स्थित डीजल लोकोमोटिव वर्क्स के महाप्रबंधक ने इस निर्देश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे खारिज किए जाने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरटीआई कानून केवल उन निजी जानकारियों को रोकता है, जिनका सार्वजनिक हित से कोई संबंध न हो. अदालत ने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक भर्ती के अंक साझा करने से किसी की निजता का अनावश्यक हनन नहीं होता है. हालांकि, यदि किसी मामले में कोई जांच लंबित हो, तो उस विशेष अवधि तक जानकारी को रोका जा सकता है.

उत्तर पुस्तिका की कॉपी पर कोर्ट का रुख: अदालत ने कहा कि दूसरे अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी मांगना एक पूर्ण अधिकार के रूप में नहीं देखा जा सकता. इसका कारण यह है कि उत्तर पुस्तिकाओं में परीक्षक के हस्ताक्षर या अन्य संवेदनशील विवरण हो सकते हैं जो सार्वजनिक नहीं किए जाने चाहिए. ऐसे मामलों में अभ्यर्थी को केवल उत्तर पुस्तिका का अवलोकन करने देना ही कानूनन पर्याप्त माना जा सकता है. हाईकोर्ट ने अंत में दोहराया कि आरटीआई का मूल उद्देश्य सार्वजनिक हित की जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना है.

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का नया दौर: इस निर्णय से भविष्य में होने वाली सभी सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ना तय माना जा रहा है. अब अभ्यर्थी किसी भी संदेह की स्थिति में अपने साथी प्रतियोगियों के प्राप्तांक आसानी से जान सकेंगे. इससे चयन प्रक्रिया में होने वाली गड़बड़ियों और पक्षपात की संभावनाओं पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अंकों की जानकारी देना अनिवार्य है, भले ही उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां देना अनिवार्य न हो.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button