
ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में श्रम विभाग ने 35 ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। इससे करीब 15 हजार मजदूरों को सीधा लाभ मिलेगा। अब कंपनियों को कामगारों के बैंक खातों में बिना कोई कटौती किए न्यूनतम मजदूरी और बाकी सुविधाएं सीधे ट्रांसफर करनी पड़ेंगी, जिससे प्रक्रिया में ज्यादा स्पष्टता आएगी।
ठेकेदार पहले वेतन लेते थे
श्रम विभाग ने 35 ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। इन 35 ठेकेदारों के साथ लगभग 15000 मजदूर काम कर रहे थे। ठेकेदारों पर कार्रवाई से कामगारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अब फैक्ट्रियां और कंपनियां सीधे श्रमिकों के अकाउंट में न्यूनतम मजदूरी जमा करेंगी। ज्यादातर ठेकेदार कंपनी या फैक्ट्री संचालकों से मजदूरों का भुगतान खुद वसूलते हैं। फिर वे कामगारों को उनका वेतन देते हैं। श्रम विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि ठेकेदार न्यूनतम मजदूरी में कटौती करके भुगतान कर रहे थे।
PF-ESIC में भी अनियमितताएं बरत रहे थे ठेकेदार
वे मजदूरों के साथ पीएफ और ईएसआईसी योजनाओं में भी अनियमितताएं बरत रहे थे। इस मामले में श्रम विभाग ने कार्रवाई की। शनिवार को 10 ठेकेदारों और मंगलवार को 25 ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द किए। जांच में पता चला कि कई मजदूरों के नाम पर योगदान या तो जमा नहीं हो रहा था या कम रकम डाली जा रही थी। लाइसेंस रद्द होने से ठेकेदारों के कामगारों को कोई दिक्कत नहीं आएगी।
245 ठेकेदारों को नोटिस जारी किया गया है
अब कंपनी मैनेजमेंट खुद जिम्मेदारी संभालेगा। हर महीने मजदूरी, ओवरटाइम, पीएफ, ईएसआईसी और बाकी लाभ सीधे बैंक खातों में जमा करेगा। इससे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और बिचौलियों की तरफ से की जा रही कटौती रुकेगी। शनिवार और सोमवार को श्रम विभाग ने 245 ठेकेदारों को मजदूरों के साथ वेतन कटौती और योजनाओं में फायदा देने में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस जारी किए थे। नोटिस जारी कर सभी से फौरन जवाब मांगा गया था। दो दिन में 35 ठेकेदारों पर कार्रवाई हो चुकी है।



