
हल्द्वानी में आज भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हो रही है। बैठक की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रभारी दुष्यंत गौतम, पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत समेत सरकार के मंत्री, प्रदेश पदाधिकारी,सभी जिलों के अध्यक्ष-महामंत्री और मोर्चा-प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों ने ध्वजारोहरण किया। बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी पहुंचेंगे। शाम 5 बजे प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक और शाम 7 बजे कोर कमेटी की बैठक में नितिन नवीन शामिल होंगे।
दो राजनीतिक प्रस्ताव पारित
बैठक में आज दो राजनीतिक प्रस्ताव पारित हुए। साथ ही विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत का संकल्प का प्रस्ताव केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा ने रखा। वहीं, वंदेमातरम मातरम पर कांग्रेस के रुख की निंदा की गई। पहले प्रस्ताव में पीएम मोदी के 25 साल के मुख्यमंत्री-प्रधानमंत्री कार्यकाल पर चर्चा हुई। उनकी उपलब्धियों पर भी बात हुई। उनका आभार जताया गया। दूसरे प्रस्ताव में हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले पर कांग्रेस के रुख की निंदा की गई। ये तय हुआ विकास, विरासत, संरक्षण पर चुनाव मैदान में जाएंगे। समाज विरोधी, देश विरोधी कांग्रेस का जनता के समक्ष खुलकर विरोध करेंगे।
नैनीताल बीजेपी के ज़िला अध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट ने कहा कि आज पूरे नैनीताल ज़िले में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बहुत खुशी का माहौल है। यह एक ऐतिहासिक पल है क्योंकि उन्हें अपने युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष को देखने और सुनने का मौका मिल रहा है। उनके नैनीताल दौरे ने पूरे उत्तराखंड राज्य में एक खास ऊर्जा भर दी है, और मैं ज़िले के कार्यकर्ताओं में बहुत उत्साह देख रहा हूँ। हम अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का बहुत गर्मजोशी और दिल से स्वागत करते हैं… लोग जश्न मनाने और उनका स्वागत करने के लिए कई जगहों पर बड़ी संख्या में इकट्ठा हो रहे हैं।
नितिन नवीन की क्लास में मंत्रियों-विधायकों का लगेगा नंबर
उत्तराखंड में 2027 में हैट्रिक की तैयारी में जुटी भाजपा का हल्द्वानी में होने जा रहा दो दिवसीय महामंथन सिर्फ औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि मौजूदा मंत्रियों और विधायकों के भविष्य का रिपोर्ट कार्ड माना जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में होने वाली प्रदेश कार्यसमिति में जिलों के पदाधिकारियों, मोर्चों और केंद्रीय व प्रांतीय नेतृत्व की फीडबैक रिपोर्ट के आधार पर ही प्रत्याशियों की कुंडली तैयार होगी।
सूत्रों के मुताबिक इस बार टिकट का फैसला केवल जीत-हार या सर्वे से नहीं, बल्कि संगठन की जमीनी रिपोर्ट से होगा। किस विधानसभा में विधायक सक्रिय है, किसका जनता और कार्यकर्ताओं से संवाद टूटा है, बूथ समितियां कितनी सक्रिय हैं, मंडल स्तर पर संगठन कितना मजबूत है और सरकार की योजनाएं जमीन तक कितनी पहुंचीं, इन सभी बिंदुओं पर जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों, मोर्चा अध्यक्षों और कोर कमेटी से सीधा फीडबैक लिया जाएगा।
पार्टी के लिए यह समीक्षा दोहरे स्तर पर होगी। पहली मंत्री-विधायक की कुंडली कि उनकी क्षेत्र में सक्रियता, जनता से संपर्क, कार्यकर्ता के साथ तालमेल और छवि को लेकर स्वतंत्र फीडबैक। जहां सरकार के प्रति नाराजगी कम लेकिन विधायक को लेकर असंतोष होगा, वहां खतरे की घंटी मानी जाएगी। दूसरी संगठन की कुंडली कि बूथ प्रबंधन, कमजोर बूथों की पहचान, मंडल में गुटबाजी और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की स्थिति रहेगी।
यही वजह है कि यह कार्यसमिति आम पार्टी कार्यकर्ता से ज्यादा 2027 के टिकट के दावेदारों के लिए अहम मानी जा रही है। मौजूदा चेहरों में जो रिपोर्ट में मजबूत पाए जाएंगे, पार्टी उन पर फिर भरोसा जता सकती है, जबकि कमजोर रिपोर्ट वाले मंत्रियों और विधायकों की सीट पर नए चेहरे, जातीय-सामाजिक समीकरण और संगठन से आए नामों पर मंथन के संकेत हैं। हालांकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर टिकट परिवर्तन पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन कुमाऊं की राजधानी हल्द्वानी से शुरू हो रहा राष्ट्रीय अध्यक्ष का दौरा साफ संदेश दे रहा है – 2027 की जीत का रास्ता जमीनी रिपोर्ट कार्ड से ही निकलेगा।


