उत्तर प्रदेशराज्‍य

यूपी चुनाव से पहले EVM पर अखिलेश और मायावती के एक सुर, सपा बोली- सारी सीटें जीत जाएं तब भी खिलाफ

वैसे तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच सियासी दूरी किसी से छिपी नहीं है लेकिन उन दोनों के सामने एक ऐसा मुद्दा आया है, जिस पर विधानसभा चुनाव से ऐन पहले दोनों ही दल एकमत हो चुके हैं। दरअसल, समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती द्वारा देश में बैलेट पेपर से मतदान कराए जाने की मांग का समर्थन किया है और दो टूक लहजे में सोमवार को कहा कि चुनाव में सभी सीटें जीतने के बाद भी उनकी पार्टी बैलेट पेपर से मतदान की मांग करती रहेगी।

अखिलेश यादव इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों में बैलेट पेपर से चुनाव हो सकते हैं तो भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता। पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में यादव ने कहा कि निर्वाचन आयोग में बदलाव या मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने जैसे कदम तभी संभव होंगे, जब भाजपा को सत्ता से हटाया जाएगा। उनके अनुसार, भाजपा के सत्ता में रहते व्यवस्था में बदलाव लगभग असंभव है।

सबसे बड़ी जमीन माफिया पार्टी

उन्होंने उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध बढ़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश साइबर धोखाधड़ी का केंद्र बनता जा रहा है, लेकिन सरकार इसे रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने ईवीएम में कथित छेड़छाड़ को भी साइबर धोखाधड़ी जैसा बताया। सपा अध्यक्ष ने भाजपा पर किसानों की जमीन के अधिग्रहण के नाम पर बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए उसे ”सबसे बड़ी जमीन माफिया पार्टी” बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं पर सरकारी जमीन और तालाबों पर कब्जे के आरोप लगते रहे हैं।

मुसलमानों का संविधान में पूरा विश्वास

उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा माफिया से जब्त की गई 84 हजार हेक्टेयर जमीन के दावे पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि वह जमीन अब कहां है। यादव ने सरकार पर मदरसों के साथ भेदभाव करने और लोगों को बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का संविधान में पूरा विश्वास है, लेकिन सरकार उनकी मस्जिदों को गिराने पर आमादा है। उन्होंने अपने आवास को भी अवैध घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं की कई इमारतें कथित तौर पर अवैध हैं और सरकारी जमीन तथा तालाबों पर अतिक्रमण के मामले सामने आते रहे हैं।

चुनाव में अनियमितताओं का भी आरोप

उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनाव में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया। यादव ने कहा कि भाजपा सरकार का काम लोगों को बांटना रह गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने रोजगार और शिक्षा दोनों के क्षेत्र में आधे-अधूरे काम किए हैं। सपा अध्यक्ष ने शिक्षामित्रों की स्थिति सुधारने का आश्वासन देते हुए कहा कि उनकी पार्टी की सरकार बनने पर शिक्षामित्रों के हित में काम किया जाएगा और उन्हें शिक्षक के रूप में सम्मान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था भी बहाल की जाएगी। यादव ने कहा कि इंजीनियरिंग में पहले सेमेस्टर व्यवस्था थी और अब इसे डिग्री कॉलेजों में भी लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि सपा की सरकार बनने पर इस व्यवस्था को भी बदला जाएगा। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से हटाने का संकल्प जताते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा, रोजगार और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर उनकी पार्टी काम करेगी।

देश में दोबारा बैलेट पेपर से चुनाव हो- मायावती

अखिलेश से पहले बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए देश में दोबारा बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मतदाता को इस बात का पूरा भरोसा होना चाहिए कि उसके द्वारा दिया गया वोट उसी प्रत्याशी के पक्ष में दर्ज और मतगणना में शामिल हुआ है, जिसे उसने मतदान किया है। मायावती ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का प्रयोग कर सरकार चुनने का अधिकार दिया है और संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों के संचालन की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग को सौंपी गई है।

लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति

उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें प्रत्येक मतदाता बिना किसी संदेह के अपनी पसंद के प्रत्याशी को वोट दे सके और उसका मत उसी के पक्ष में गिना जाए। उन्होंने कहा कि यदि मतदाता को यह संदेह हो कि उसका वोट किसी दूसरे प्रत्याशी के खाते में चला गया या उसकी गणना नहीं हुई तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास प्रभावित होगा। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति बताया। दोनों ही पूर्व मुख्यमंत्रियों ने चुनाव से ठीक पहले EVM पर हल्ला बोलकर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खासकर तब जब चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लग रहे हैं और उसे भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोपी ठहराया जा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button