अंतर्राष्ट्रीय

अमेरिका का एच-1बी वीजा पर नया प्लान, फीस एक लाख डॉलर से अधिक करने का प्रस्ताव

वाशिंगटन। डोनल्ड ट्रंप प्रशासन अमेरिकी वीजा नियमों को कड़ा करने के उद्देश्य से H-1B और F-1 ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) प्रोग्राम्स पर भारी-भरकम फीस लगाने की योजना बना रहा है।

फेडरल रजिस्टर के अनुसार, अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) H-1B वीजा फीस से बढ़ाकर 1,03,265 डॉलर करने पर विचार कर रहा है।

इसके साथ ही, यूनिवर्सिटी से निकरकर वर्कप्लेस में प्रवेश करने वाले विदेशी छात्रों के लिए लागू OPT आवेदनों पर भी 100,000 डॉलर की फीस का प्रस्ताव रखा जा सकता है।

पेशेवरों और छात्रों पर बढ़ेगा बोझ

कॉर्पोरेट इमिग्रेशन सर्विस फर्म फ़्रैगोमेन के विश्लेषण के मुताबिक, ये दोनों नियम लागू होने पर अमेरिका में काम करने वाले विदेशी पेशेवरों, अंतरराष्ट्रीय छात्रों और उन्हें स्पॉन्सर करने वाले अमेरिकी एम्प्लॉयर्स का वित्तीय बोझ अभूतपूर्व रूप से बढ़ जाएगा।

यह बदलाव भारतीय नागरिकों के लिए बेहद चिंताजनक है, क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा प्राप्त करने वालों में 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी भारतीयों की है।

आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सेवाओं (USCIS) ने वर्ष 2024 में कुल 3,99,402 H-1B याचिकाओं को मंजूरी दी थी, जिनमें से लगभग 71 प्रतिशत याचिकाएं भारत में जन्मे पेशेवरों के लिए थीं।

फीस से जुड़ा नियम प्रस्ताव भेजा गया

इमिग्रेशन कानून फर्म फ्रैगोमेन ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया कि ये नीतियां और प्रस्ताव पहले ही व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB) की समीक्षा प्रक्रिया से गुजर चुके हैं।

OPT फीस से जुड़ा नियम प्रस्ताव 20 अगस्त को OMB को भेजा गया था। DHS की इस प्रस्तावित फीस वृद्धि को प्रशासन के पूर्व में रोके गए 100,000 डॉलर की H-1B याचिका फीस से जुड़े चल रहे अदालती मुकदमों के साथ जोड़कर भी देखा जा रहा है।

हालांकि, इन प्रस्तावों के विस्तृत विवरण अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और इन्हें अंतिम रूप दिए जाने के बाद जारी किया जाएगा।

60 दिन की मोहलत खत्म होने का खतरा

अत्यधिक फीस के इस प्रस्ताव के अलावा, हाल ही में DHS ने बेरोजगार H-1B कर्मचारियों के लिए उपलब्ध 60 दिनों की मोहलत, ग्रेस पीरियड, को भी समाप्त करने की सिफारिश की है।

वर्तमान नियमों के तहत, यदि किसी H-1B वर्कर की नौकरी उसकी वीजा अवधि खत्म होने से पहले चली जाती है, तो उसे नई नौकरी खोजने या स्टेटस बदलने के लिए 60 दिन का समय मिलता है। लेकिन नया नियम लागू होने पर ग्रेस पीरियड पूरी तरह खत्म हो जाएगा, जिससे नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों और उनके आश्रितों को तुरंत अमेरिका छोड़ना पड़ेगा या फिर वे अवैध प्रवास के भागीदार बन जाएंगे।

52 लाख भारतीय मूल के लोग

अमेरिकी जनगणना आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 52 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग अमेरिका में रहते हैं। ऐसे में वीजा नियमों में यह कड़ाई हजारों भारतीय परिवारों के भविष्य को अनिश्चितता में डाल सकती है।

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