व्यापार

कच्चा तेल $115 के पार, क्या भारत में महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल और राशन? जानें सरकार की क्या है तैयारी

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि इस बार सरकार ऊर्जा और फर्टिलाइजर स्टॉक के साथ पहले से कहीं बेहतर तरीके से तैयार दिख रही है, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतें रुपये और करेंट अकाउंट डेफिसिट को नुकसान पहुंचाएंगी। इसके अलावा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) पर भी बुरा असर पड़ सकता है, जो पहले से ही दबाव में है। कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। इसमें एक डॉलर की तेजी से भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल 18,000 हजार करोड़ रुपये बढ़ जाता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है।

फ्रेट की दरें पहले से ही काफी ऊंची हैं । कुछ रूट्स पर तो यह युद्ध-पूर्व के स्तर से लगभग 10 गुना ज्यादा हैं। अब बीमा प्रीमियम बढ़ने से ये दरें और भी बढ़ सकती हैं। ऐसे माहौल में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जाने के लिए जहाज और क्रू मिलना मुश्किल हो रहा है। इसका असर निर्यात और पूरी सप्लाई चेन पर पड़ेगा। पूर्वी गोलार्ध में कंटेनरों की कमी देखी जा रही है और दुनिया के कुछ हिस्सों में बंदरगाहों पर भारी भीड़ भी है।

कितना है किराया?

22 अक्टूबर को Drewry World Container Index के अनुसार 40 फीट के एक कंटेनर का किराया 4,585 डॉलर था, जबकि 25 अक्टूबर, 2025 को यह 1,746 डॉलर था। Drewry ने कहा, “पूर्व-पश्चिम कंटेनर फ्रेट मार्केट में अनिश्चितता बनी हुई है। सुरक्षा जोखिमों और जहाजों पर हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। 42वें सप्ताह में खाड़ी क्षेत्र में केवल दो कंटेनर जहाज गए, जबकि पिछले सप्ताह यह संख्या पांच थी। वहीं, स्वेज नहर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी हुई है – 41वें सप्ताह में 54 जहाज गुजरे थे, जो 42वें सप्ताह में बढ़कर 55 हो गए।”

टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक FIEO के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय ने कहा, “माल ढुलाई की दरें पहले ही एक हद से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। अभी तक तो खरीदार काम चला रहे थे क्योंकि उनके पास इन्वेंट्री कम थी। अब जब उनके पास स्टॉक जमा हो गया है, तो यह साफ नहीं है कि वे इतनी ऊंची ढुलाई लागत को झेल पाएंगे या नहीं। पश्चिम एशिया में कोई भी नई उथल-पुथल बाकी दुनिया के लिए भी नुकसानदेह साबित होगी।” उन्होंने बताया कि पश्चिम एशियाई बंदरगाहों के लिए कंटेनर का किराया 800 डॉलर से बढ़कर अब 8,000 से 10,000 डॉलर तक पहुंच गया है।

कच्चे तेल की कीमत

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जाने वाले क्रू और जहाजों को लेकर भी चिंताएं हैं, क्योंकि यह इलाका इस संघर्ष का मुख्य केंद्र बन गया है। कुल मिलाकर, ज्यादातर कारोबारियों का मानना ​​है कि किसी भी तरह की अनिश्चितता से बचना ही बेहतर है, खासकर ऐसे युद्ध से जिसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता हो।

भारतीय रिफाइनरियों के लिए तेल सबसे बड़ी चिंता का विषय है। अक्टूबर में कच्चे तेल की औसत कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल रही, जो पिछले 12 साल में सबसे ज्यादा मासिक औसत है। इसके अलावा, पेट्रोल की औसत कीमत 140 डॉलर प्रति बैरल और डीजल की कीमत 154 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा रही। इससे सरकारी रिटेल कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है क्योंकि उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की कीमतें, उनके आयात मूल्य से जुड़ी होती हैं।

हालांकि सरकार ने ड्यूटी में कटौती करके और बाद में कीमतें बढ़ाने की अनुमति देकर उन्हें कुछ राहत दी थी, लेकिन केंद्र सरकार के पास वित्तीय रियायतें देने की गुंजाइश सीमित है। ईंधन और खाद पर दी जाने वाली सब्सिडी पहले ही पिछले साल के स्तर को पार कर चुकी है। अगर जरूरत पड़ी तो सरकार को और ज्यादा फंड देना पड़ सकता है।

आयात बिल में उछाल

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि फर्टिलाइजर कंपनियों ने कीमतों में आई गिरावट का फायदा उठाते हुए अगले सीजन के लिए स्टॉक जमा कर लिया है। साथ ही, बचत होने की वजह से उर्वरक मंत्रालय के पास कुछ अतिरिक्त नकदी भी मौजूद है। केंद्र सरकार के पास कुछ राहत की गुंजाइश है, क्योंकि विनिवेश से मिलने वाली रकम और सरकारी वित्तीय संस्थानों तथा RBI से मिलने वाला डिविडेंड, बजट में तय किए गए अनुमान से ज्यादा रहा है।

इसके अलावा, टैक्स कलेक्शन भी अब तक ठीक-ठाक बना हुआ है, जिससे उम्मीद है कि राजकोषीय घाटा GDP के 4.3% के लक्ष्य के भीतर ही रहेगा। लेकिन, कमोडिटी की कीमतें बढ़ने से आयात बिल में भारी उछाल आएगा। इसका असर व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे पर पड़ेगा। साथ ही, रुपये की कमजोर स्थिति के कारण विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय शेयरों में निवेश करना कम आकर्षक हो जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button