आर्थिक संबंध मजबूत करने 70 सदस्यीय दल के साथ सिंगापुर पहुंचे पीयूष गोयल

कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल आज से 21 अगस्त तक सिंगापुर के दौरे पर हैं. लेकिन यह कोई आम दौरा नहीं है. इस बार उनके साथ करीब 70 बड़े बिजनेसमैन भी गए हैं. यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत तेजी से लायन सिटी के नाम से मशहूर सिंगापुर को एशिया के कारोबारी और निवेश गेटवे के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है. भारतीय कारोबारी सिंगापुर की कंपनियों और इंस्टीट्यूशंस के साथ मीटिंग करेंगे. इनमें टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर, AI, मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक, हेल्थकेयर और एग्रीकल्चर पर बड़ी डील होने की संभावना है.
पीयूष गोयल के साथ जो 70 बिजनेसमैन गए हैं, उनमें अलग अलग सेक्टर के कारोबारी हैं. ये लोग B2B यानी बिजनेस-टू-बिजनेस, G2B यानी सरकार-से-बिजनेस वाली मीटिंग में हिस्सा लेंगे. मुख्य एजेंडा इन्वेस्टमेंट, नए बाजार, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और कर्मचारियों की ट्रेनिंग का रहने वाला है. पीयूष गोयल सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से भी मिलेंगे. इसके अलावा Temasek Holdings, Keppel Infrastructure, Milken Institute, Singapore Business Federation और कई अन्य बड़े बिजनेस घरों के साथ भी डील करने वाले हैं.
एग्रीकल्चर और फूड प्रोडक्ट पर फोकस
सरकार भारतीय एग्रीकल्चर और फूड प्रोडक्ट को सिंगापुर के मार्केट में उतारना चाहती है. सिंगापुर भी इसके लिए तैयार दिख रहा है, इसीलिए सरकार लगातार फोकस कर रही है. सिंगापुर के रिटेल मार्केट में भारतीय एग्रीकल्चर और फूड प्रोडक्ट की पहले ही डिमांड रही है, लेकिन सरकार इसे बढ़ाना चाहती है. गोयल सिंगापुर बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे और आसियान कांफ्रेंस में भी शामिल रहेंगे. यानी सरकार सीधे कंपनियों, इन्वेस्टर्स और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के साथ डील कर रही है. सिंगापुर में इंपोर्ट के नए रास्ते तलाश रही है.
सिंगापुर बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर
सिंगापुर भारत के लिए पहले से ही बेहद महत्वपूर्ण कारोबारी साझेदार है. वह ASEAN में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है और भारत के लिए विदेशी निवेश और External Commercial Borrowings का भी बड़ा स्रोत है. दोनों देशों के बीच CECA लागू होने के बाद व्यापार तेजी से बढ़ा है. FY2004-05 में भारत-सिंगापुर द्विपक्षीय व्यापार 6.7 अरब डॉलर था, जो FY2025-26 में बढ़कर 36.1 अरब डॉलर हो गया. ऐसे में 70 भारतीय बिजनेसमैन को साथ लेकर पीयूष गोयल का सिंगापुर दौरा साफ संकेत देता है कि भारत अब इस रिश्ते को सिर्फ व्यापार तक नहीं, बल्कि निवेश, AI, टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल मार्केट एक्सेस तक ले जाना चाहता है.
सिंगापुर से भारत को क्या मिलेगा?
- बड़ा विदेशी निवेश: सिंगापुर FY2025-26 में भारत में 19.8 अरब डॉलर FDI का सबसे बड़ा स्रोत रहा. नए निवेश से इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक और मैन्युफैक्चरिंग को पैसा मिल सकता है.
- AI और टेक्नोलॉजी साझेदारी: 70 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में AI, सॉफ्टवेयर और टेक कंपनियां हैं. इससे भारतीय कंपनियों को सिंगापुर की टेक कंपनियों और निवेशकों के साथ नए प्रोजेक्ट मिल सकते हैं.
- भारतीय कंपनियों को एशियाई बाजार: सिंगापुर को दक्षिण-पूर्व एशिया का कारोबारी गेटवे माना जाता है. वहां मजबूत साझेदारी से भारतीय कंपनियों के लिए ASEAN और दूसरे एशियाई बाजारों में प्रवेश आसान हो सकता है.
- भारतीय कृषि उत्पादों की बिक्री: APEDA-FairPrice पहल का मकसद भारतीय खाद्य और कृषि उत्पादों की सिंगापुर के रिटेल बाजार में मौजूदगी बढ़ाना है. यानी भारतीय किसानों और फूड कंपनियों के लिए नया एक्सपोर्ट बाजार बन सकता है.
- फाइनेंस और ग्लोबल कैपिटल: सिंगापुर भारत के लिए बड़ा वित्तीय केंद्र है. वहां के फंड, फैमिली ऑफिस और वित्तीय संस्थानों से निवेश आने पर भारतीय कंपनियों को ग्रोथ के लिए विदेशी पूंजी मिल सकती है. भारत में सिंगापुर से कुल संचयी FDI अप्रैल 2000 से मार्च 2026 तक 194.68 अरब डॉलर पहुंच चुका है.



