उत्तर प्रदेशराज्‍य

महिला आरक्षण बिल पर सियासी घमासान तेज, योगी सरकार ने 30 अप्रैल को बुलाया विधानमंडल का विशेष सत्र

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) को लेकर चल रहे घमासान के बीच यूपी की योगी सरकार ने 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। रविवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के माध्यम से इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सोमवार को इस प्रस्ताव को राज्यपाल की आधिकारिक स्वीकृति के लिए राजभवन भेजा जाएगा। इस कदम के बाद यूपी के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है कि आखिर सरकार की मंशा क्या है?

नियमों के अनुसार, विधानमंडल का सत्र बुलाने के लिए सदस्यों को कम से कम सात दिन पहले सूचना देना अनिवार्य होता है। समय की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने कैबिनेट की औपचारिक बैठक का इंतजार करने के बजाय ‘कैबिनेट बाई सर्कुलेशन’ के जरिए प्रस्ताव को तुरंत हरी झंडी दे दी। माना जा रहा है कि सरकार इस मुद्दे पर एक दिन की भी देरी नहीं करना चाहती ताकि विपक्ष को संभलने का मौका न मिले।

विपक्ष की घेराबंदी का मेगा प्लान

नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के क्रियान्वयन और विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर भाजपा अब आक्रामक रुख अख्तियार कर चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, 30 अप्रैल को आयोजित होने वाले इस विशेष सत्र में सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगी और यह बताएगी कि कैसे विपक्षी दल महिलाओं के सशक्तिकरण में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। चर्चा है कि सत्र के दौरान विपक्ष के नकारात्मक रवैये को लेकर सदन में एक ‘निंदा प्रस्ताव’ भी पेश किया जा सकता है।

सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सीधा मुकाबला

यह सत्र केवल विधायी कार्यवाहियों तक सीमित नहीं रहने वाला है। सरकार का स्पष्ट आरोप है कि विपक्ष महिला सशक्तिकरण जैसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर भी ओछी राजनीति कर रहा है। वहीं, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल ‘कोटा के भीतर कोटा’ की मांग को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं। 30 अप्रैल को होने वाली यह बैठक सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सीधी राजनीतिक टकराहट का बड़ा मंच बनेगी।

महिलाओं को संदेश देने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सत्र के माध्यम से योगी सरकार महिला मतदाताओं के बीच यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा ही उनकी सच्ची हितैषी है। सत्र के दौरान महिला सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन पर सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा पेश किए जाने की भी संभावना है। चूंकि यह मुद्दा बेहद संवेदनशील है, इसलिए दोनों पक्ष अपनी-अपनी रणनीति के तहत जनता की अदालत में खुद को सही साबित करने की पुरजोर कोशिश करेंगे।

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