मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था के दम पर वैश्विक संकटों से मजबूती से लड़ रहा है भारत: RBI बुलेटिन

नई दिल्ली: दुनियाभर में जारी आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी ताजा बुलेटिन में कहा कि वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारत की आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया में इस महीने बढ़े संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे महंगाई बढ़ने और सप्लाई चेन में फिर से बाधा आने की चिंता बढ़ी है।
1. Q1 में GDP ग्रोथ मजबूत
- आरबीआई ने अपनी ‘State of the Economy’ रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ मजबूत रही।
- अगस्त तक के हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से भी घरेलू मांग में मजबूती के संकेत मिले हैं। इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर के कई हिस्सों ने भी वैश्विक दबावों के बावजूद बेहतर प्रदर्शन किया।
- रिजर्व बैंक ने यह भी चेतावनी दी कि कुछ प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से सरकारों के वित्त पर दबाव बढ़ सकता है।
2. FCNR(B) डिपॉजिट से रुपये को मिला था सहारा
- केंद्रीय बैंक के अनुसार सितंबर की शुरुआत में मजबूत FCNR(B) डिपॉजिट फ्लो के कारण रुपये में थोड़ी रिकवरी देखने को मिली थी।
- हालांकि, महीने के बाद के हिस्से में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण यह मजबूती टिक नहीं सकी।
- RBI ने बताया कि करीब 133 अरब डॉलर के FCNR(B) फ्लो के बाद बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त अतिरिक्त लिक्विडिटी बनी हुई है।
- इससे अर्थव्यवस्था में जारी क्रेडिट ग्रोथ को समर्थन मिल सकता है। खासतौर पर इंडस्ट्री को कर्ज देने की रफ्तार में तेजी देखने को मिली है।
3. तेजी से बढ़ी बैंक डिपॉजिट
- अगस्त में बैंकों के डिपॉजिट में बढ़ोतरी पिछले करीब 15 साल के सबसे तेज स्तर पर पहुंच गई।
- इसके चलते नए जमा और नए कर्ज के बीच का अनुपात भी कुछ कम हुआ है।
- RBI ने कहा कि अगस्त में ज्यादातर हाई-फ्रीक्वेंसी आर्थिक संकेतक स्वस्थ बने रहे, जो घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती का संकेत देते हैं।
4. जुलाई में नेट एफडीआई 64% बढ़ा
- विदेशी निवेश के मोर्चे पर भी भारत के लिए अच्छी खबर सामने आई है। आरबीआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में भारत में नेट एफडीआई 64% बढ़कर 7.3 अरब डॉलर हो गया।
- इस दौरान ग्रॉस एफडीआई इनफ्लो 31% से ज्यादा बढ़कर 14.6 अरब डॉलर पहुंच गया।
- जुलाई में इक्विटी एफडीआई का बड़ा हिस्सा कम्युनिकेशन, फाइनेंशियल और कंप्यूटर सर्विसेज सेक्टर में आया। इन क्षेत्रों को कुल इक्विटी इनफ्लो का चार-पांचवें से ज्यादा हिस्सा मिला।
5. इन देशों से आया सबसे ज्यादा निवेश
- रिजर्व बैंक के मुताबिक, मॉरीशस, यूएई और अमेरिका भारत में इक्विटी एफडीआई के प्रमुख स्रोत रहे।
- इन तीनों देशों की हिस्सेदारी कुल इक्विटी इनफ्लो में करीब 70% रही।
- अप्रैल-जुलाई की अवधि में भारत में नेट एफडीआई 38% बढ़कर 13.4 अरब डॉलर हो गया। वहीं, इस दौरान ग्रॉस एफडीआई 12.6% बढ़कर 43.9 अरब डॉलर रहा।
विदेशों में भारतीय निवेश भी बढ़ा
दो महीने तक गिरावट के बाद जुलाई में भारतीय कंपनियों का विदेशों में निवेश भी बढ़ा। रिजर्व बैंक के अनुसार, जुलाई में आउटवर्ड एफडीआई 26% बढ़कर 3.4 अरब डॉलर हो गया। इसमें से दो-तिहाई से ज्यादा निवेश सिंगापुर, ब्रिटेन और यूएई में गया। वित्तीय, बीमा और बिजनेस सर्विसेज के साथ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने मिलकर आउटवर्ड FDI का करीब दो-तिहाई हिस्सा हासिल किया।



