
10 मई मदर्स डे पर नोएडा के Max Super Speciality Hospital में मां की ममता की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली हैं. यहां एक मां ने अपने जिगर के टुकड़े को बचाने के लिए खुद की किडनी दान कर दी. बता दें कि माँ ने अपने 11 वर्षीय बेटे को किडनी दान कर उसे नया जीवन दिया हैं. वही सफल किडनी ट्रांसप्लांट के बाद बच्चा अब स्वस्थ है और डॉक्टरों ने उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी हैं.
बचपन से ही किडनी की बीमारी से जूझ रहा था अंश
वही अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. अमित के देवरा ने बताया कि सातवीं कक्षा में पढ़ने वाला मास्टर अंश बचपन से ही क्रोनिक किडनी डिजीज से पीड़ित था. और बढ़ते समय के साथ उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी. वही बार-बार अस्पताल आना, लगातार दवाइयों का सेवन, कमजोरी और किडनी की घटती क्षमता उसके बचपन पर भारी पड़ रही थी.
ब्लड ग्रुप अलग होने से बढ़ी चुनौती
वही जांच में सामने आया कि बच्चे की जान बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट बेहद जरूरी है. हालांकि अंश का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव था, जबकि उसकी मां सुमन का ब्लड ग्रुप बी था. ऐसे में ट्रांसप्लांट आसान नहीं था. इसके बावजूद मां ने बेटे की जिंदगी बचाने के लिए किडनी दान करने का फैसला लिया. वही डॉक्टरों की टीम ने एबीओ इनकम्पैटिबल ट्रांसप्लांट जैसी जटिल प्रक्रिया अपनाई और सर्जरी से पहले बच्चे का विशेष उपचार किया और लगातार मॉनिटरिंग भी की.
22 दिनों तक निगरानी में रहा बच्चा
हालांकि सफल सर्जरी के बाद भी बच्चे को 22 दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया. जिसके बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. वही सीनियर डायरेक्टर डॉ. विजय कुमार सिन्हा ने सफल ट्रांसप्लांट पर परिवार और मेडिकल टीम को बधाई दी. हालांकि, डॉक्टरों के मुताबिक, मां की हिम्मत और समय पर इलाज से बच्चे को नई जिंदगी मिल सकी.



