उत्तर प्रदेशराज्‍य

‘इंद्रेश की हुईं शिप्रा’… जयपुर में प्रसिद्ध कथावाचक ने दुल्हन संग लिए 7 फेरे, 3 घंटे तक चलीं विवाह की रस्में

जाने-माने कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय आज जयपुर में शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। अपनी कथाओं और प्रवचन से लोगों का मन मोह लेने वाले इंद्रेश उपाध्यान जिंदगी के नए अध्याय में प्रवेश करने वाले हैं। वो वैदिक मंत्रों के बीच रीति रिवाज के साथ हरियाणा की शिप्रा संग सात फेरे लेंगे। दोनों की शादी बड़े धूमधाम के साथ जयपुर के ताज आमेर होटल में पूरी हो रही है। शादी में कई बड़ी हस्तियां शामिल हुईं। दोनों की शादी की रस्मों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं। बता दें कि बीते दिनों ही इंद्रेश पूरे गाजे-बाजे के साथ वृंदावन से अपनी बारात लेकर जयपुर पहुंचे थे।

हरिद्वार-वृंदावन के पंडित हुए शामिल

ऐसी रिपोर्ट्स आ रही हैं कि कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय की शादी में हरिद्वार और वृंदावन के अनुभवी पंडितों के एक विशेष समूह को बुलाया गया है। ये लोग ही शादी की रस्मों को बड़ी ही खूबसूरती से पूरा करवा रहे हैं। वहीं शादी समारोह के बीच इंद्रेश उपाध्याय लड्डू गोपाल का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो लगभग 100 पंडितों ने वैदिक मंत्रों के बीच इंद्रेश और शिप्रा की शादी की रस्मों को पूरा करवा रहे हैं। वहीं मंडप की खूबसूरती देखते ही बन रही है। इंद्रेश और शिप्रा की शादी के मंडप की सजावट इतनी मनमोहक और खूबसूरत है कि उसकी भव्यता और पवित्रता ने हर किसी का ध्यान खींचा। कई लोग सोशल मीडिया पर इनके शादी के वेन्यू को मिनी वृंदावन तक कह रहे हैं।

पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए घराती-बाराती

बता दें कि इंद्रेश उपाध्याय और शिप्रा की शादी की कुछ पारंपरिक रस्में वृंदावन में ही पूरी हो चुकी थी। वहीं जयपुर में दोनों आज सात फेरे लेने वाले हैं। शादी की रस्मों में कथावाचनक इंद्रेश खूबसूरत शेरवानी में दिख रहे हैं तो वहीं शिप्रा बेहद ही खूबसूरत लहंगे में नजर आ रही हैं। वहीं इनका परिवार पारंपरिक वेशभूषा में शादी में चार चांद लगाता हुआ नजर आ रहा है। इंद्रेश और शिप्रा की शादी से जुड़ी एक-एक क्लिप सोशल मीडिया पर खूब पसंद की जा रही है। बीते दिनों ही दोनें की शादी का इन्विटेशन कार्ड का वीडियो भी खूब वायरल हुआ। बता दें कि इनकी शादी के लिए विशेष निमंत्रण पत्र बॉक्स बनवाया गया था, जिसमें शादी के कार्ड के अलावा इलायची, मिश्री, कोन धूप, प्रसाद और तुलसी माला भी रखी हुई थी।

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