बिजनेस को डूबने से बचाएगी सरकार, ₹2.5 लाख करोड़ की नई स्कीम का हुआ ऐलान

केंद्र सरकार पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis) से प्रभावित कारोबारों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को राहत देने के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये की ऋण गारंटी योजना (Credit Guarantee Scheme) लाने पर विचार कर रही है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
पीटीआई (भाषा) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण उधारकर्ताओं द्वारा ऋण चुकाने में चूक होने की स्थिति में उधारदाताओं को 100 करोड़ रुपये तक के ऋणों पर करीब 90 प्रतिशत की ऋण गारंटी प्रदान की जाएगी। बैंकऋण पर यह गारंटी नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (एनसीजीटीसी) देगी, जो सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी है। इस योजना के लिए सरकार को करीब 17,000 करोड़ से 18,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करना होगा।
कोरोना के दौरान भी लाई गई थी ऐसी योजना
सूत्रों ने बताया कि ऐसी ही योजना कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान भी लागू की गई थी, जो काफी सफल रही और विभिन्न क्षेत्रों के कई कारोबारों को काम जारी रखने एवं बकाया चुकाने में मदद मिली। सरकार ने मई 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत आपात ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) शुरू की थी। इसका उद्देश्य कोविड-19 वैश्विक महामारी से उत्पन्न व्यवधान के बीच पात्र एमएसएमई और अन्य कारोबारी इकाइयों को परिचालन देनदारियां पूरी करने और कारोबार फिर से शुरू करने में मदद देना था। इस योजना के तहत अर्थव्यवस्था के करीब सभी क्षेत्रों को शामिल किया गया था और पात्र उधारकर्ताओं को दिए गए ऋण पर सदस्य ऋणदाता संस्थानों को 100 प्रतिशत गारंटी प्रदान की गई थी।
31 मार्च 2023 तक लागू रही थी योजना
योजना की संरचना ऐसी थी कि उधारकर्ताओं को ऋण आसानी से मिल सके। ऋणदाता संस्थान उधारकर्ता के मौजूदा ऋण के आधार पर पूर्व-स्वीकृत ऋण देते थे और अतिरिक्त ऋण के लिए नया मूल्यांकन नहीं किया जाता था। इसके अलावा, ऋण पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा तय की गई थी ताकि कर्ज की लागत कम रहे एवं ऋण बिना ’प्रोसेसिंग’ (प्रक्रिया) शुल्क, पूर्व भुगतान शुल्क और गारंटी शुल्क के दिए जाते थे। यह योजना 31 मार्च 2023 तक लागू रही।
सरकार लगातार उठा रही निर्णायक कदम
इस बीच सरकार ने आम लोगों की कठिनाइयों को कम करने के लिए हाल में कई कदम भी उठाए हैं, जिनमें पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती शामिल है। भारत ने पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाया है। साथ ही महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात पर छूट दी है। विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) इकाइयों को घरेलू शुल्क क्षेत्र में संचालन की अनुमति भी दी गई है।
सरकार ने 26 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर घटाया था ताकि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के असर से उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। अमेरिका और इजराइल के 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले और उसके बाद तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है। केंद्र ने डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) यानी विमान ईंधन पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क भी लगाया है। फिलहाल पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क तीन रुपये प्रति लीटर है जबकि डीजल पर यह शून्य है। भारत ने दो अप्रैल को पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण समुद्री मार्गों में व्यवधान के बीच आपूर्ति स्थिर रखने एवं उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात को सीमा शुल्क से मुक्त कर दिया। कच्चे तेल के अलावा भारत उर्वरक और प्राकृतिक गैस का भी बड़ा आयातक है।


