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नोएडा में लिव-इन रिलेशनशिप से बढ़ता खतरा, हर माह सामने आ रहे 20 से 30 आपराधिक मामले; युवतियां बन रहीं शिकार

करियर की दौड़ और सुनहरे भविष्य के सपने युवाओं को नोएडा तो ले आए, लेकिन यहां की आजादी अब उनके लिए नई मुश्किलें पैदा कर रही है। पढ़ाई और नौकरी के बीच पनप रहे लिव-इन रिश्तों का अंत अक्सर विवादों और अपराध में हो रहा है। वन स्टॉप सेंटर के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि शहर में हर महीने लिव-इन से जुड़े 20 से 30 मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें शिकार होने वाली ज्यादातर युवतियां दूसरे शहरों से यहां आई हैं।

काउंसलिंग टीम का कहना है कि घर से दूर रहने, भावनात्मक सहारे की तलाश और सोशल मीडिया के जरिए बनी नजदीकियां युवाओं को जल्दी फैसले लेने के लिए उकसाती है। लेकिन जब ये रिश्ते जिम्मेदारियों और हकीकत से टकराते हैं, तो हालात बिगड़ने लगते हैं और कई युवतियां मानसिक तनाव व असुरक्षा का सामना करती हैं।

आंकड़ों दर्शा रहे चिंता का स्तर

हर माह कुल केस: 20–30
18–22 वर्ष आयु वर्ग: 12–17 मामले
शादीशुदा महिलाओं के केस: 4–5
नाबालिग लड़कियां: 1–2 मामले
परिवार द्वारा अपनाए गए केस: 90%
परिवार द्वारा ठुकराए गए केस: 10%

केस 1: कोचिंग, दोस्ती और फिर टूटता भरोसा

21 वर्षीय युवती बड़े सपनों के साथ नोएडा कोचिंग के लिए आई थी। शुरुआत में सब सामान्य था, लेकिन पीजी में रहने के दौरान उसकी मुलाकात एक युवक से हुई। दोनों के बीच दोस्ती गहरी हुई और उसने उस पर भरोसा कर उसके साथ रहने का फैसला कर लिया। कुछ समय बाद जब खर्चों और जिम्मेदारियों को लेकर विवाद शुरू हुए तो रिश्ता धीरे-धीरे टूटने लगा। युवक का व्यवहार बदल गया और युवती खुद को अकेला महसूस करने लगी। मानसिक तनाव के बीच वह वन स्टाप सेंटर पहुंची, जहां काउंसलिंग के बाद उसने हिम्मत जुटाई और खुद को उस स्थिति से बाहर निकालकर पढ़ाई पर दोबारा ध्यान देना शुरू किया।

केस 2: ऑनलाइन प्यार का जाल

22 वर्षीय युवती की दोस्ती एक सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर हुई। युवक ने खुद को जिम्मेदार और सहारा देने वाला बताया। भरोसे में आकर युवती उसके साथ रहने लगी, लेकिन कुछ ही महीनों में सच्चाई सामने आने लगी। व्यवहार में बदलाव, झगड़े और असुरक्षा ने उसे तोड़ दिया। मामला बढ़ने पर वह वन स्टॉप सेंटर पहुंची, जहां टीम ने हस्तक्षेप कर उसे सुरक्षित बाहर निकाला और परिवार से जोड़ने की कोशिश की।

सोशल मीडिया का ‘छद्म’ प्रेम और टूटे सपने

22 वर्षीय एक युवती के लिए सोशल मीडिया पर शुरू हुई दोस्ती एक बुरे सपने में बदल गई। खुद को ‘जिम्मेदार साथी’ बताने वाले युवक के झांसे में आकर युवती उसके साथ लिव-इन में रहने लगी। हालांकि, चंद महीनों में ही युवक का मुखौटा उतर गया और युवती को मानसिक प्रताड़ना व असुरक्षा का सामना करना पड़ा। आखिर में वन स्टॉप सेंटर की टीम ने उसे इस जहरीले रिश्ते से बाहर निकालने के साथ ही काउंसलिंग के जरिए उसे दोबारा परिवार से मिलाने की पहल भी की।

केस 3: गुस्सा बड़ा खतरा

17 वर्षीय लड़की घर में छोटी सी बात पर नाराज होकर निकल गई। बिना सोचे-समझे वह एक युवक के संपर्क में आ गई और नोएडा पहुंच गई। हालात बिगड़ते देख मामला सेंटर तक पहुंचा। काउंसलिंग के दौरान लड़की भावुक हो गई और अपनी गलती स्वीकार की। समय रहते उसे सुरक्षित परिवार के पास भेज दिया गया, जिससे एक बड़ा खतरा टल गया।

केस 4: शादी से दूर, फिर बच्चों की याद ने बदला फैसला

28 वर्षीय शादीशुदा महिला जो दो बच्चों की मां थी। वैवाहिक तनाव से परेशान होकर एक परिचित के साथ लिव-इन में रहने लगी। शुरुआत में उसे यह फैसला सही लगा, लेकिन धीरे-धीरे बच्चों की याद और समाज का दबाव उस पर हावी होने लगा। काउंसलिंग के दौरान वह कई बार भावुक हुई और आखिरकार उसने अपने बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए परिवार में लौटने का फैसला लिया।

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