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नोएडा इंजीनियर केस: प्राधिकरण ने SIT को सौंपी 20 अफसरों की सूची, सीएम योगी को भेजी जाएगी रिपोर्ट

नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एक निर्माणाधीन इमारत में 16 जनवरी की देर रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा बटोरी। बढ़ते जनआक्रोश और मीडिया कवरेज के बाद यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुँच गया। मुख्यमंत्री ने घटनाक्रम की गहन जांच के निर्देश दिए और विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया।

SIT को सौंपी गई अधिकारियों की सूची

SIT के निर्देश पर नोएडा प्राधिकरण ने हादसे वाले प्लॉट और आसपास के क्षेत्र में पिछले दो-तीन वर्षों के दौरान तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों का विस्तृत विवरण सौंपा। इस सूची में जूनियर इंजीनियर, असिस्टेंट प्रोजेक्ट इंजीनियर (APE) और अन्य तकनीकी स्टाफ सहित कुल लगभग 20 नाम शामिल हैं।

SIT का उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि संबंधित क्षेत्र में किन-किन अधिकारियों की तैनाती रही, ताकि यह पता लगाया जा सके कि लापरवाही किस स्तर पर हुई। प्राधिकरण ने विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर यह जानकारी उपलब्ध कराई।

अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच

SIT ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच केवल वर्तमान तैनाती वाले अधिकारियों तक सीमित नहीं होगी। पूर्व में तैनात अधिकारियों की भूमिका, निर्माण स्थल की निगरानी, सुरक्षा इंतजाम और जलभराव जैसी संभावित चूक का भी विस्तार से विश्लेषण किया जाएगा।

अधिकारियों की सूची का महत्व

नोएडा प्राधिकरण द्वारा प्रदान की गई सूची SIT के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। इसी आधार पर यह तय होगा कि किस अधिकारी ने अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरती। अंतिम रिपोर्ट में निलंबन, विभागीय कार्रवाई या अन्य दंडात्मक कदमों की सिफारिश की जा सकती है।

रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी

SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट में इन 20 अधिकारियों के नामों को शामिल कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपेगी। हालांकि, पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा तैयार अलग रिपोर्ट में और भी कई नाम शामिल बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री स्तर से पहले ही सख्ती के संकेत मिल चुके हैं, जिससे रिपोर्ट आने के बाद त्वरित कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

जनआक्रोश और स्थानीय लोगों की चिंता

युवराज मेहता की मौत के बाद से ही नोएडा कमिश्नरेट पुलिस, जिला प्रशासन और प्राधिकरण की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

स्थानीय लोगों का मानना है कि अक्सर ऐसे मामलों में जांच लंबी खिंच जाती है और मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। हालांकि इस बार मुख्यमंत्री की सीधी निगरानी के चलते जिम्मेदारों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

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