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भारतीय कर्ज बाज़ार में महिलाओं का दबदबा, ₹76 लाख करोड़ पहुंचा क्रेडिट पोर्टफोलियो

नई दिल्ली। भारत में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है और इसका बड़ा संकेत क्रेडिट (Female Borrowers Rising) के क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025 तक महिला कर्जदारों का कुल बकाया कर्ज 76 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो देश के कुल क्रेडिट का लगभग 26% है। यह आंकड़ा 2017 के मुकाबले लगभग पांच गुना बढ़ोतरी को दर्शाता है और बताता है कि देश की क्रेडिट व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आ रहा है।

TransUnion Cibil, Niti Aayog के WEP, और MicroSave Consulting की एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, अब महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं रहीं, बल्कि खुद कर्ज की मांग को आगे बढ़ाने वाली प्रमुख शक्ति बनती जा रही हैं। 2017 से 2025 के बीच औपचारिक कर्ज लेने वाली महिलाओं की संख्या में हर साल औसतन 9% की दर से वृद्धि हुई है।

पुरुषों की तुलना में तेजी से बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी

इसी अवधि में महिलाओं का कुल बकाया कर्ज 4.8 गुना बढ़ा, जबकि कुल क्रेडिट में वृद्धि 2.9 गुना ही रही। इससे साफ है कि महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ रही है।

TransUnion Cibil के MD और CEO भावेश जैन ने कहा, “भारत में औपचारिक क्रेडिट लेने वाली महिलाओं की संख्या 2017 और 2025 के बीच 9% की CAGR से बढ़ी है, जो वित्तीय प्रणाली के साथ उनकी बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करता है। महिला कर्जदारों के लिए बकाया क्रेडिट 2017 के बाद से 4.8 गुना बढ़ा है, जबकि कुल क्रेडिट में 2.9 गुना वृद्धि हुई है, जो काफी तेज विस्तार का संकेत है। हाल के वर्षों में, डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास ने आसान ऑनबोर्डिंग, तेज ऋण प्रसंस्करण और जानकारी तक बेहतर पहुंच को सुगम बनाया है।”

डिजिटल तकनीक ने निभाई अहम भूमिका

डिजिटल तकनीक ने भी इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अब लोन लेना आसान हो गया है, प्रोसेसिंग तेज हुई है और जानकारी तक पहुंच भी बेहतर हुई है। इससे अधिक महिलाएं बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़ पाई हैं।

रिटेल लोन में भी महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है। 2022 में जहां यह 24% थी, वहीं 2025 में बढ़कर 27% हो गई। खास बात यह है कि पहली बार कर्ज लेने वाली महिलाओं की संख्या में भी तेज वृद्धि हुई है। 2025 में रिटेल क्रेडिट में नई महिला कर्जदारों की हिस्सेदारी 38% तक पहुंच गई, जो पहले से 10 प्रतिशत अंक अधिक है।

बिजनेस के लिए भी कर्ज ले रही हैं महिलाएं

महिलाएं अब सिर्फ व्यक्तिगत जरूरतों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यवसाय के लिए भी कर्ज ले रही हैं। पिछले तीन वर्षों में बिजनेस लोन लेने वाली महिलाओं की संख्या में 31% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह इस बात का संकेत है कि महिलाएं उद्यमिता की ओर तेजी से बढ़ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय पहुंच महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने का एक मजबूत आधार है। जब महिलाओं को आसानी से कर्ज मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार की स्थिति सुधारती हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

कुल मिलाकर, ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारत में महिलाएं अब आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन रही हैं और आने वाले समय में उनकी भूमिका और भी मजबूत होने की संभावना है।

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