उत्तर प्रदेशराज्‍य

कौन हैं सुरेंद्र दिलेर? योगी कैबिनेट में बनेंगे मंत्री, खैर से बने MLA; राजनीतिक सफर और भाजपा की रणनीति

 योगी सरकार 2.0 के दूसरे कैबिनेट विस्तार में राज्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने जा रहे सुरेंद्र दिलेर की तीन पीढ़ियां भाजपा में रही हैं। उनके दादा बाबा किशनलाल दिलेर छह बार विधायक और चार बार सांसद रहे, जबकि उनके पिता राजवीर सिंह दिलेर भाजपा से हाथरस सांसद और इगलास के विधायक रह चुके थे। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद राजवीर सिंह दिलेर का निधन हो गया।

इसके बाद पार्टी ने तीसरी पीढ़ी पर भरोसा जताते हुए सुरेंद्र दिलेर को खैर उपचुनाव में अनूप प्रधान की जगह मैदान में उतारा। उन्होंने सपा प्रत्याशी चारू कैन को हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचने में सफलता हासिल की। नवंबर 2024 में हुए उपचुनाव में सुरेंद्र दिलेर ने सपा प्रत्याशी चारू कैन को 38,393 मतों से हराकर जीत हासिल की।

अगले साल यानी 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव से पहले योगी मंत्रिमंडल विस्तार में अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर का नाम सामने आते ही वेस्ट यूपी की सियासत में चर्चाएं तेज हो गईं। सुरेंद्र दिलेर की योगी कैबिनेट में एंट्री को यूपी की जातीय राजनीति और विपक्ष के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले की काट के बीजेपी के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सुरेंद्र दिलेर के जरिए भाजपा ने दलित और पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को एक साथ साधने की कोशिश की है। सुरेंद्र दिलेर को योगी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को समाजवादी पार्टी के पीडीए फॉर्मूले के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि भाजपा सुरेंद्र दिलेर के जरिए दलित वर्ग, विशेषकर वाल्मीकि समाज में अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहती है।

इसके पहले खैर विधानसभा सीट से विधायक रहे अनूप प्रधान भी योगी सरकार में राज्य मंत्री रह चुके हैं। अनूप प्रधान वर्तमान में हाथरस सीट से सांसद हैं। माना जा रहा है कि सुरेंद्र दिलेर को योगी कैबिनेट में शामिल किए जाने से वेस्ट यूपी में बीजेपी और मजबूत होगी। सुरेंद्र दिलेर के परिवार की तीन-तीन पीढ़ियां सक्रिय राजनीति में रही हैं। किशनलाल दिलेर के बाद दूसरी पीढ़ी में राजवीर सिंह दिलेर सांसद-विधायक बने।

अब तीसरी पीढ़ी में सुरेंद्र दिलेर खैर से विधायक हैं। वेस्ट यूपी के सियासी जानकारों का कहना है सुरेंद्र दिलेर के जरिए भाजपा इस क्षेत्र के अनुसूचित जाति वर्ग के वोटरों में खुद को और मजबूत बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। इससे एक साथ बीजेपी ने दो संदेश दिए हैं। एक तो जातीय सियासत के लिहाज से महत्वपूर्ण है वहीं दूसरा संदेश अलीगढ़ जिले को सरकार में प्रतिनिधित्व देने का है।

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