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उत्तर प्रदेश सुगम्य व्यापार-2025 अध्यादेश लागू, औद्योगिक अपराधों पर अब सजा नहीं सिर्फ जुर्माना, निवेशकों को राहत

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में व्यापार को सुगम बनाने और उद्यमियों को राहत देने के उद्देश्य से ‘उत्तर प्रदेश सुगम्य व्यापार (प्रावधानों का संशोधन) अध्यादेश-2025’ जारी कर दिया है। इस अध्यादेश के तहत अब कई व्यापारिक और प्रशासनिक कानूनों में कारावास की सजा समाप्त कर दी गई है। इसके स्थान पर केवल जुर्माने की व्यवस्था की गई है। अध्यादेश को शुक्रवार को प्रमुख सचिव (विधायी) जेपी सिंह ने जारी किया। सरकार का उद्देश्य है कि राज्य में कारोबारी माहौल को और बेहतर बनाया जाए तथा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के मानकों के अनुरूप कानूनों को उदार बनाया जाए।

हर तीन साल में बढ़ेगा जुर्माना

नई व्यवस्था के अनुसार, विभिन्न अधिनियमों में तय की गई जुर्माने की राशि हर तीन साल में 10 प्रतिशत बढ़ाई जाएगी। इसका मकसद समय के साथ जुर्माने की वास्तविक प्रभावशीलता बनाए रखना है।

प्रमुख बदलावों की सूची:

  • उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति एवं क्रय का विनियमन) अधिनियम: इसके तहत नियमों के वायलेशन के मामले में पहले 6 माह तक की सजा का प्रावधान था। अब केवल 2 लाख रुपये तक जुर्माना का प्रवधान किया गया है।
  • उत्तर प्रदेश सिनेमा (विनियमन) अधिनियम, 1955: इसके तहत नियम तोड़ने पर पहले एक माह की सजा का प्रावधान था। अब केवल जुर्माना लगेगा। जुर्माने की राशि आबादी के आधार पर तय होगी। 5 लाख आबादी तक वाले शहर में नियम तोड़ने पर 1 लाख रुपये जुर्माना लगेगा। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में जुर्माना राशि 5 लाख रुपये तक होगी।
  • नगर निगम अधिनियम, 1959: इसके तहत अब केवल जुर्माना लगेगा। सजा का प्रावधान खत्म कर दिया गया है।
  • क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम: इसके तहत पहले सजा और 20,000 रुपये जुर्माना का प्रावधान था। अब नियमों के तोड़ने के मामले में कोई सजा नहीं होगी। 2 लाख तक जुर्माना लगाया जाएगा।
  • मादक पान (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम: इसके तहत कारावास की सजा को समाप्त कर दिया गया है। अब केवल 75,000 रुपये तक जुर्माना लगेगा।
  • औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम: इसके तहत नियम तोड़ने पर कारावास की सजा को हटाया गया। अब केवल 25,000 रुपये तक जुर्माना लगेगा।
  • वृक्ष संरक्षण अधिनियम: इसके तहत नियम तोड़ने पर पहले के 6 माह की जेल की सजा को समाप्त कर दिया गया है। अब 1000 रुपये से 10,000 रुपये तक जुर्माना लगेगा।
  • उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता: जमीन से संबंधित भ्रामक सूचना देने पर अब 2 लाख रुपये तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है।
  • भू-जल प्रबंधन एवं विनियमन अधिनियम, 2019: इसके तहत नियम तोड़ने के मामले में अब दंड 2 लाख से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना निर्धारित किया गया है। दोबारा नियमों का उल्लंघन करने पर 10 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही, एनओसी रद्द करने का प्रावधान किया गया है।
  • अग्निशमन एवं आपात सेवा अधिनियम: इसके तहत 3 माह की सजा और 75,000 रुपये जुर्माने की व्यवस्था की गई है।

उद्यमियों को राहत, किया स्वागत

राज्य सरकार के इस फैसले को उद्योग जगत में सकारात्मक कदम माना जा रहा है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अब छोटे-मंझोले कारोबारियों को मामूली तकनीकी उल्लंघनों पर जेल का डर नहीं रहेगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह संशोधन ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करेगा। निवेशकों को आकर्षित करेगा। अधिकारियों के मुताबिक, अब कारोबारी बिना भय के काम कर सकेंगे, जबकि सरकार के पास कानून तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाने का अधिकार बना रहेगा।

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