यूपी पुलिस को 4 साल बाद मिलने जा रहा स्थायी डीजीपी, दिल्ली की बैठक में ये 3 नाम तय

लखनऊ। लगभग चार वर्ष बाद राज्य को जल्द ही स्थायी डीजीपी मिलने वाला है। स्थायी डीजीपी के चयन को लेकर मंगलवार को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के साथ मुख्य सचिव एसपी गोयल व अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद ने करीब दो घंटे मंथन किया।
सूत्रों के अनुसार बैठक में स्थायी डीजीपी के चयन को लेकर वरिष्ठता के आधार पर तीन नामों पर सहमति बन गई है। यूपीएससी द्वारा जल्द ही इन तीनों नामों का पैनल राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर पिछली 18 मार्च को 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके आइपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल यूपीएससी को भेजा गया था।
डीजीपी के चयन के लिए वर्तमान तैनाती के दौरान डीजी का रैंक व कम से कम छह माह की सेवानिवृत्ति का शेष होना जरूरी है। वर्तमान में 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी डीजी रेणुका मिश्रा सबसे वरिष्ठ हैं।
इसके अलावा वर्ष 1991 बैच के आलोक शर्मा वरिष्ठता क्रम में दूसरे नंबर और इसी बैच के पीयूष आनंद तीसरे और राजीव कृष्ण चौथे नंबर पर हैं। आलोक शर्मा एसपीजी के निदेशक हैं और अगले माह सेवानिवृत्त हो रहे हैं। पियूष आनंद एनडीआरएफ के डीजी हैं और डीजी रेणुका मिश्रा पुलिस मुख्यालय से संबद्ध हैं।
नतीजतन उम्मीद की जा रही है कि रेणुका मिश्रा, पियूष आनंद और राजीव कृष्ण के नाम का पैनल यूपीएससी राज्य सरकार को भेजेगा। प्रशांत कुमार के 31 मई 2025 को सेवानिवृत्त होने के बाद राजीव कृष्ण को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया था। इसलिए डीजीपी की रेस में उनका नाम सबसे आगे चल रहा है।
फिलहाल आयोग द्वारा पैनल भेजे जाने के बाद राज्य सरकार तीनों अधिकारियों की विजिलेंस जांच कराएगी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किसी एक नाम पर मोहर लगाएंगे। मुकुल गोयल को वर्ष 2022 में हटा दिया गया था।
इसके बाद से प्रदेश में लगातार कार्यवाहक डीजीपी तैनात किए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद से स्थायी डीजीपी की चयन की कवायद की जा रही है।



