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जनवरी के मुकाबले फरवरी में बढ़ी महंगाई; 2.74% से बढ़कर 3.21% हुई रिटेल इन्फ्लेशन

ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग ने पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ा दी है. भारत पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है. गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मिडिल ईस्‍ट में व्‍यापारिक अनिश्चिता और जियो-पॉलिटिक टेंशन के बीच भारत में खुदरा महंगाई फरवरी में 3.21% रही. यही महंगाई जनवरी में  2.74% पर थी.

महंगाई के नए आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब ईरान, इजरायल और संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका के बीच तनाव ने ग्‍लोबल तेल आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं को बढ़ा दिया है. इकोनॉमिस्‍ट्स का कहना है कि लंबे समय तक आपूर्ति में कमी भारत जैसे ऊर्जा निर्भर अर्थव्‍यवस्‍थाओं के लिए महंगाई बढ़ सकती है.

मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य महंगाई फरवरी में जनवरी के 2.13 फीसदी की तुलना में 3.47 फीसदी बढ़ी. बिजली, गैस और अन्‍य ईंधन कैटेगरी में महंगाई 0.14 फीसदी रही. ग्रामीण महंगाई जनवरी के 2.73% से बढ़कर फरवरी में 3.37% हो गई, जबकि शहरी महंगाई 2.75 फीसदी से बढ़कर 3.02% हो गई, जो भारतीय रिजर्व बैंक के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से नीचे रही.

इन चीजों में रही गिरावट 

अखिल भारतीय स्तर पर फरवरी में कुछ रसोई की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में गिरावट जारी रही. लहसुन की महंगाई जनवरी के -53.03% की तुलना में -31.09% रही, जबकि प्याज की कीमतों में -28.20% की गिरावट आई, जो एक महीने पहले की -29.30% की गिरावट से थोड़ी कम है. आलू की कीमतें भी -18.46% पर बनी रहीं, जो जनवरी में -28.98% की गिरावट से कम है.

सर्विस और घरेलू घटक 

संशोधित CPI बास्केट के तहत कई सेवा और घरेलू क्षेत्रों में कीमतों पर दबाव भी चर्चा का विषय बना रहा. फरवरी में आवास महंगाई 2.12% रही, जबकि जनवरी में यह 2.05% थी। कपड़ों और जूतों की महंगाई फरवरी में 2.81% दर्ज की गई, जबकि जनवरी में यह 2.98% थी.

रेस्तरां और आवास सेवाओं की महंगाई फरवरी में 2.73% रही, जबकि जनवरी में यह 2.87% थी. स्वास्थ्य सेवाओं की महंगाई 1.90% रही, जबकि पिछले महीने यह 2.19% थी. सूचना और संचार सेवाओं की महंगाई फरवरी में 0.25% रही, जबकि जनवरी में यह 0.16% थी.

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