उत्तर प्रदेशराज्‍य

चैट से खुला दो करोड़ की चढ़ावा चोरी का राज, टिन्नू ही निकला राम मंदिर मामले का मास्टरमाइंड

राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. जिन चैट्स को आरोपियों ने हमेशा के लिए मिटा हुआ समझ लिया था, वही अब उनके खिलाफ सबसे बड़े सबूत बनते दिख रहे हैं. अयोध्या पुलिस ने साइबर सेल की मदद से आरोपियों के मोबाइल का बैकअप हासिल कर लिया है. करीब एक साल पहले डिलीट किया गया डेटा भी रिकवर कर लिया गया है.

सूत्रों के मुताबिक, रिकवर हुए मोबाइल डेटा से 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की कथित चोरी से जुड़े सुराग मिले हैं. चैट्स में चोरी की रकम के बंटवारे को लेकर आरोपियों के बीच आपस में ही विवाद होने की बातें सामने आई हैं. जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को पहले से शक था कि आरोपियों ने मोबाइल बदल दिए हैं और पुराने फोन का डेटा डिलीट कर दिया है. इसी वजह से साइबर एक्सपर्ट्स की मदद ली गई.

फॉरेंसिक जांच के दौरान न सिर्फ पुराने मोबाइल का बैकअप निकाला गया, बल्कि करीब एक साल पहले डिलीट किए गए चैट, डेटा और दूसरी डिजिटल जानकारी भी रिकवर कर ली गई. पुलिस ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा के नए मोबाइल फोन का डेटा भी हासिल कर लिया है. अब जांच टीम इन डिजिटल रिकॉर्ड को पूरे केस की टाइमलाइन से जोड़कर देख रही है.

‘तू ज्यादा पैसे रख रहा है…’

सूत्रों के मुताबिक, रिकवर हुई चैट्स में सबसे बड़ा खुलासा पैसों के बंटवारे को लेकर हुआ है. फरवरी 2026 में अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा के बीच चोरी की रकम को लेकर तीखी बहस हुई थी. चैट्स में अनुकल्प, लवकुश पर आरोप लगा रहा था कि उसने ज्यादा रकम अपने पास रख ली और उसका पूरा हिस्सा नहीं दिया. यानी जिस रकम के लिए कथित तौर पर पूरा खेल खेला गया, उसी रकम के बंटवारे ने आरोपियों के बीच दरार भी पैदा कर दी.

2 करोड़ से ज्यादा की रकम के मिले सुराग

सूत्रों के मुताबिक, मोबाइल डेटा से पुलिस को 2 करोड़ रुपये से अधिक की कथित चोरी से जुड़ी जानकारी मिली है. अब जांच टीम इन चैट्स में लिखी रकम का मिलान बैंक खातों में हुए ट्रांजेक्शन से कर रही है. अगर चैट्स और बैंक रिकॉर्ड एक-दूसरे से मेल खाते हैं, तो यह जांच की सबसे मजबूत कड़ियों में से एक हो सकता है.

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आरोपियों ने नए मोबाइल फोन खरीद लिए थे. पुलिस को शक है कि ऐसा पुराने डिजिटल सबूतों से दूरी बनाने के लिए किया गया होगा. लेकिन साइबर फॉरेंसिक जांच में नए फोन का डेटा भी खंगाल लिया गया. पुलिस अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या पुराने फोन से नए फोन में कोई डेटा ट्रांसफर हुआ था और क्या आरोपियों ने आपस में दूसरे माध्यमों से भी बातचीत की थी.

सिर्फ मोबाइल चैट्स ही नहीं, पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों की भी बारीकी से जांच कर रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चैट्स में जिन रकमों का जिक्र है, क्या वही रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर भी हुई थी. इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि चोरी की कथित रकम से किन-किन लोगों ने कार, बाइक, मकान या दूसरी संपत्तियां खरीदीं.

चोरी की रकम से अविनाश ने खरीदी थी कार

इस पूरी कहानी में जांच में सामने आया कि आरोपी अविनाश शुक्ला ने चोरी की रकम से खरीदी गई कार अपने नाम पर नहीं, बल्कि भाई अभिषेक के नाम पर खरीदी थी. मामला सामने आने के बाद कार को प्रतापगढ़ स्थित गांव भिजवा दिया गया था. पुलिस ने रिमांड के दौरान आरोपी की निशानदेही पर कार बरामद कर ली है. अब यह भी जांच की जा रही है कि चोरी की रकम से और कौन-कौन सी संपत्तियां खरीदी गईं.

जांच का दायरा अब अयोध्या से निकलकर प्रतापगढ़ तक पहुंच चुका है. पुलिस की टीम आरोपी अविनाश शुक्ला को उसके गांव भी लेकर गई, जहां बाइक और अन्य सामान की बरामदगी के साथ-साथ पूछताछ में सामने आए तथ्यों का वेरीफिकेशन किया गया. स्थानीय पुलिस भी आरोपी के घर और परिवार से जुड़े आर्थिक लेनदेन की जानकारी जुटा रही है.

अब यह पता लगाया जा रहा है कि चोरी की रकम का इस्तेमाल किन-किन माध्यमों से किया गया और क्या परिवार के अन्य लोगों को भी इसकी जानकारी थी. इधर, पुलिस अब इस मामले के बाकी पांच आरोपियों से भी पूछताछ की तैयारी में है. कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद जांच अधिकारी जेल जाकर अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, करुणेश पांडे और मनीष यादव से पूछताछ करने वाले हैं.

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