यूपी के सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली में होगा बड़ा बदलाव, कैबिनेट बैठक में संशोधन को मिल सकती है स्वीकृति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली 1956 में महत्वपूर्ण संशोधन करने जा रही है। प्रस्तावित बदलावों के तहत कर्मचारियों के निवेश और संपत्ति से जुड़े नियमों को पहले से अधिक सख्त बनाया जाएगा। नए नियम लागू होने के बाद यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष के दौरान अपने छह माह के मूल वेतन से अधिक राशि स्टॉक, शेयर या अन्य निवेश माध्यमों में लगाता है, तो उसे इसकी जानकारी संबंधित प्राधिकारी को देना अनिवार्य होगा। वर्तमान नियमों में इस प्रकार की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है।
कैबिनेट बैठक में मिल सकती है संशोधन को मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी मिलने की संभावना है। कार्मिक विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव के अनुसार अब यदि कोई कर्मचारी दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति का लेनदेन करता है, तो उसे इसकी जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को देनी होगी। अभी तक यह सीमा एक माह के मूल वेतन के बराबर थी, जिसे अब बढ़ाकर दो माह किया जा रहा है।
हर साल देनी होगी अचल संपत्ति की जानकारी
नए प्रस्ताव के तहत सभी सरकारी कर्मचारियों को अपनी अचल संपत्ति का विवरण हर वर्ष देना अनिवार्य किया जाएगा। इसके अनुसार कर्मचारी को अपनी पहली नियुक्ति के समय और उसके बाद हर साल अपनी अचल संपत्तियों की घोषणा करनी होगी। वर्तमान में यह जानकारी हर पांच वर्ष में देने का नियम लागू है, जिसे बदलकर वार्षिक कर दिया जाएगा।
हालांकि सरकार पहले से ही कर्मचारियों से नियमित रूप से संपत्ति का विवरण लेती रही है, लेकिन अब इसे नियमावली में शामिल कर इसे और अधिक सख्त और पारदर्शी बनाया जाएगा।
परिवार के नाम की संपत्ति और निवेश की भी देनी होगी जानकारी
नए नियमों के तहत कर्मचारियों को केवल अपनी ही नहीं बल्कि अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर अर्जित संपत्तियों का भी पूरा विवरण देना होगा। इसमें खरीदी गई संपत्ति, दान में मिली संपत्ति, पट्टे या गिरवी पर रखी गई संपत्ति और अन्य प्रकार के निवेश शामिल होंगे। इससे सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विकास प्राधिकरणों के बकायेदारों को मिल सकती है राहत
प्रदेश सरकार विकास प्राधिकरणों और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद से आवंटित भवनों और भूखंडों की किस्त समय पर जमा न कर पाने वाले बकायेदारों को राहत देने की तैयारी भी कर रही है। इसके लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) 2026 लागू करने का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है।
इस योजना के तहत प्रदेश में 19 हजार से अधिक डिफॉल्टर आवंटियों को राहत मिलने की संभावना है।
ओटीएस योजना में दंड ब्याज से पूरी छूट
एकमुश्त समाधान योजना के अंतर्गत आवासीय, व्यावसायिक, स्कूल भूखंड, चैरिटेबल और सरकारी संस्थाओं के भूखंडों के साथ-साथ सहकारी आवास समितियों और मानचित्र से जुड़े बकायेदारों को भी राहत मिलेगी। योजना के तहत बकाया राशि पर लगने वाले दंड ब्याज को पूरी तरह माफ किया जा सकता है।
इसके साथ ही बकायेदारों को किस्तों में भुगतान करने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। बकाया राशि पर केवल साधारण ब्याज लिया जाएगा, जो आवंटन के समय निर्धारित किस्तों पर लागू होता है।
बकाया राशि चुकाने के लिए किस्तों की सुविधा
यदि किसी आवंटी पर 50 लाख रुपये तक का बकाया है तो उसे चार माह के भीतर किस्तों में भुगतान करने की सुविधा दी जा सकती है। वहीं यदि बकाया राशि 50 लाख रुपये से अधिक है तो सात माह तक की अवधि में किस्तों के माध्यम से भुगतान किया जा सकेगा।
तीन माह में होगा आवेदन का निस्तारण
ओटीएस योजना के तहत आवेदन करने के बाद तीन माह के भीतर उसका निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। यदि तय समय सीमा में आवेदन का निपटारा नहीं किया जाता है, तो इससे होने वाली वित्तीय हानि की वसूली संबंधित प्राधिकरण या परिषद के जिम्मेदार कर्मचारी से की जाएगी।



