उत्तर प्रदेशराज्‍य

बांके बिहारी मंदिर की वर्तमान व्यवस्था बदलने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, दो हफ्ते बाद फिर होगी सुनवाई

वृंदावन के प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ और सख्त रुख अपनाया है. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि मंदिर में चली आ रही धार्मिक परंपराओं और मौजूदा व्यवस्था में फिलहाल कोई ढांचागत बदलाव नहीं किया जाएगा. मंदिर के रीति‑रिवाजों को लेकर उठे सवालों के बीच अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का संकेत दिया है, जिससे पुजारियों और श्रद्धालुओं दोनों को बड़ी राहत मिली है.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर की प्रबंध समिति और सेवायतों की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अदालत द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने कुछ ऐसे प्रशासनिक फैसले लिए हैं, जो सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं में दखल देते हैं.

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने क्या कहा

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई करते हुए साफ शब्दों में कहा कि अदालत मौजूदा व्यवस्था में किसी भी तरह का ढांचागत बदलाव करने के पक्ष में नहीं है. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की है, ताकि सभी पक्ष हाल में दाखिल की गई स्थिति रिपोर्ट पर अपना जवाब दे सकें.

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि समिति ने अपनी शक्तियों की व्याख्या जरूरत से ज्यादा व्यापक तरीके से की है. आरोप है कि समिति ने मंदिर की जरूरी धार्मिक गतिविधियों से जुड़े कुछ आदेश जारी किए हैं, जिनसे परंपरागत पूजा‑पाठ प्रभावित हो रहा है.

किन फैसलों पर जताई गई चिंता?

सेवायतों की ओर से जिन मुद्दों को उठाया गया है, उनमें दर्शन के समय में बदलाव, देहरी पूजा की पुरानी परंपरा बंद करना और फूल बंगला सेवा के लिए सेवायत गोस्वामियों पर अत्यधिक शुल्क तय करना शामिल है. उनका कहना है कि ये फैसले मंदिर की आत्मा और परंपरा के खिलाफ हैं. वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि उन्हें स्थिति रिपोर्ट रविवार देर शाम मिली है. उन्होंने इस पर जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया.

सरकार का पक्ष भी आया सामने

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एम नटराज ने अदालत से कहा कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ही काम कर रही है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि समिति किसी भी तरह से अदालत के आदेशों के खिलाफ कदम नहीं उठाएगी.

पहले भी लग चुकी है अध्यादेश पर रोक

गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 के कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई थी. इसके साथ ही मंदिर के कामकाज की देखरेख के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अशोक कुमार की अगुवाई में 12 सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया था.

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