यूपी : गलत फॉर्मूले से 14 महीने तक ईंधन अधिभार वसूलता रहा पावर कॉरपोरेशन, नियामक आयोग ने जताई नाराजगी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के जून में 10 प्रतिशत ईंधन और विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (FPPCA) की वसूली के मामले में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने कड़ा फैसला लिया है. आयोग की द्विसदस्यीय पीठ ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि पावर कारपोरेशन की अब तक की गई एफपीपीसीए गणना पूरी तरह गलत है.
आयोग ने आदेश में स्पष्ट किया कि एफपीपीसीए की मासिक गणना सिर्फ उसी माह की वास्तविक बिजली खरीद लागत और ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर की जाएगी. किसी अन्य माह की देनदारी या समायोजन को एफपीपीसीए में शामिल नहीं किया जा सकता. आयोग ने फैसले में कहा कि पावर कारपोरेशन आगे इस प्रकार की गलती न करे और कानून की परिधि में रहकर ही कार्य करे.
दरअसल, यूपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक की ओर से 19 जून को आयोग में दाखिल जवाब में स्वीकार किया गया था कि पिछले 14 माह से पूरे प्रदेश में एफपीपीसीए की वसूली एक विशेष फार्मूले के आधार पर की जा रही थी और जून माह में भी उसी फार्मूले का उपयोग किया गया. इसके बाद यह स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं से पिछले एक वर्ष से अधिक समय से गलत तरीके से एफपीपीसीए की वसूली की जा रही थी.
ऐसे में अब उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के समक्ष सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इस अवधि में हुई अतिरिक्त वसूली का लाभ उपभोक्ताओं को किस प्रकार वापस दिलाया जाए. उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि अब एक विधिक सवाल पैदा हो गया है कि विद्युत नियामक आयोग को एक महीने नहीं, पूरे 14 महीने के हिसाब को देखना पड़ेगा और तभी जनता को लाभ मिल पाएगा.
आयोग के इस निर्णय से यह साबित हो गया है कि यूपीपीसीएल पिछले 14 माह से गलत फार्मूले का उपयोग कर बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार डाल रहा था. ऐसी स्थिति में आयोग को पूरे एक वर्ष से अधिक अवधि की एफपीपीसीए गणना की समीक्षा कर उपभोक्ताओं को न्याय दिलाना चाहिए. अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो यह प्रदेश के करोड़ों विद्युत उपभोक्ताओं के साथ गंभीर अन्याय होगा.
उपभोक्ता परिषद इस मुद्दे को विद्युत नियामक आयोग के समक्ष लोक महत्व याचिका के माध्यम से लेकर गया था. अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए पावर कारपोरेशन प्रबंधन और प्रमुख सचिव ऊर्जा की जिम्मेदारी तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए. अगर संबंधित अधिकारियों को एफपीपीसीए लागू करने की सही प्रक्रिया और फार्मूले का ज्ञान नहीं था, तो प्रदेश की जनता पर गलत वित्तीय भार क्यों डाला गया. उन्हें गुमराह क्यों किया गया, इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए.


