महिला सशक्तीकरण पर यूपी विधानमंडल का विशेष सत्र आज, महिलाओं के अधिकार के मुद्दे पर सपा-कांग्रेस को घेरेगी भाजपा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज का दिन अहम रहने वाला है, क्योंकि विधानसभा और विधान परिषद का विशेष सत्र महिला सशक्तीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर केंद्रित होगा। एक ओर सरकार इस सत्र के जरिए महिला कल्याण और सशक्तीकरण से जुड़े अपने एजेंडे को मजबूती देने की तैयारी में है, तो वहीं विपक्ष भी इस मौके को सरकार को घेरने के लिए उपयोग करने की रणनीति बना चुका है। ऐसे में यह विशेष सत्र सिर्फ चर्चा तक सीमित न रहकर राजनीतिक टकराव और आरोप-प्रत्यारोप का मंच भी बन सकता है, खासकर तब जब राज्य में महिला मतदाताओं की भूमिका लगातार निर्णायक होती जा रही है।
सुबह 11 बजे से शुरू होगा विशेष सत्र
विधानमंडल का विशेष सत्र गुरुवार सुबह 11 बजे से शुरू होगा। विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना महिला सशक्तीकरण पर चर्चा का प्रस्ताव पेश करेंगे। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय सहित विभिन्न दलों के नेता और सदस्य अपने विचार रखेंगे। अंत में नेता सदन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चर्चा का समापन करेंगे।
कार्यवाही से पहले पेश होंगे अध्यादेश
विशेष सत्र की शुरुआत विधायी कार्यों से होगी, जिसमें सरकार राजस्व संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2026 समेत छह अध्यादेश सदन में पेश करेगी। इससे पहले कार्य मंत्रणा समिति और कार्य परामर्शदात्री समिति की बैठकों में सत्र की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में हुई बैठक में पांच घंटे के सत्र का एजेंडा तय किया गया।
सियासी घमासान के आसार
इस विशेष सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों पूरी तैयारी में हैं। भाजपा और उसके सहयोगी दल जहां महिला सशक्तीकरण और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर विपक्ष को घेरने की कोशिश करेंगे, वहीं विपक्षी दल कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा करने की रणनीति बना रहे हैं।
2027 चुनाव से जुड़ी रणनीति
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक यह विशेष सत्र 2027 के विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए सभी राजनीतिक दल महिला केंद्रित योजनाओं, सुरक्षा और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों को अपने-अपने तरीके से पेश करने की तैयारी में हैं। यह सत्र उन रणनीतियों को मजबूत करने का मंच बन सकता है।
सपा का ‘अति निंदा प्रस्ताव’
विशेष सत्र से पहले समाजवादी पार्टी ने सरकार के खिलाफ अपना रुख साफ कर दिया है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा विधायकों ने पार्टी मुख्यालय को प्रतीकात्मक सदन बनाकर ‘अति निंदा प्रस्ताव’ पारित किया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने स्पीकर की भूमिका निभाते हुए प्रस्ताव को पारित घोषित किया।
सपा की महिला विधायकों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए भाजपा पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा महिलाओं को वास्तविक अधिकार देने के बजाय इसे राजनीतिक नारे के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है।
महिला मुद्दों पर सियासत तेज
सपा नेताओं और विधायकों ने केंद्र और राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य वास्तविक सशक्तीकरण नहीं बल्कि राजनीतिक लाभ हासिल करना है। वहीं भाजपा इस मुद्दे को महिला सशक्तीकरण के बड़े एजेंडे के रूप में पेश करने की तैयारी में है।



