यूपी में वित्तविहीन स्कूलों की मान्यता के नियम हुए सरल, सरकारी जमीन पर भी खुलेंगे विद्यालय

माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश में वित्त विहीन विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया के नियमों में बदलाव कर आसान कर दिया है। परिषद के विनियमों (अध्याय-7) में व्यापक संशोधन और शिथिलीकरण लागू होने से नए विद्यालयों को मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले की अपेक्षा अधिक सहज होगी।
परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि शासन के निर्देशों के क्रम में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। संशोधित प्रावधानों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में विद्यालयों के लिए न्यूनतम 3000 वर्गमीटर भूमि अनिवार्य होगी, जिसमें 1000 वर्गमीटर का खेल मैदान शामिल रहेगा। यह खेल मैदान विद्यालय परिसर से अधिकतम 200 मीटर की दूरी तक भी स्थित हो सकेगा।
वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम 6000 वर्गमीटर भूमि तथा 2000 वर्गमीटर खेल मैदान का प्रावधान रखा गया है। मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल अब पूरे वर्ष खुला रहेगा, जिससे संस्थाएं अपनी सुविधा के अनुसार आवेदन कर सकेंगी।
इसके अलावा, अब केवल पंजीकृत समिति, ट्रस्ट या नॉट फॉर प्रॉफिट कंपनियां ही नहीं, बल्कि सांविधिक निकाय, स्वायत्तशासी संस्थाएं, सार्वजनिक उपक्रम और स्थानीय निकाय भी विद्यालय की मान्यता के लिए आवेदन कर सकेंगे।
परिषद ने 30 वर्ष की पंजीकृत लीज डीड पर भी विद्यालयों को मान्यता देने का प्रावधान किया है। साथ ही, पूर्व में लागू 20 हजार रुपये के विलंब शुल्क के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक को अब 20 अगस्त तक आख्या एवं संस्तुति भेजने होगा।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत 26 दिसंबर 2022 से पूर्व मान्यता प्राप्त विद्यालयों को नए वर्ग अथवा विषय की मान्यता के लिए केवल अतिरिक्त कक्षा-कक्ष और प्रयोगशाला की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। अन्य पूर्व शर्तों में भी आवश्यक शिथिलता प्रदान की गई है।
सचिव भगवती सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921 की धारा 16(2) के तहत संशोधित विनियम प्रभावी कर दिए गए हैं। सभी संबंधित संस्थाएं और आवेदक परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर विस्तृत दिशा-निर्देश एवं संशोधित नियमों का अवलोकन कर सकते हैं।



