आजमगढ़ की सभी 10 सीटों पर राजभर का ऐलान, संजय निषाद ने जताया एतराज, इस सीट पर ठोंका दावा

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं, लेकिन इसकी तैयारी राजनीतिक दलों ने अभी से शुरू कर दी है। सपा-कांग्रेस के साथ ही भाजपा और इसके सहयोगी दल भी अपने राजनीतिक समीकरण के अनुसार जिताऊ सीट तलाशने में जुटे हैं। सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर पूर्वांचल, अवध और पश्चिमांचल की 62 सीटों पर नजर हुए हैं। दूसरी ओर, निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद भी अपनी निषाद मतदाताओं के माध्यम से ताकत दिखाने में जुटे हुए हैं।
विशेष बातचीत में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने बताया कि भाजपा हमारे लिए बड़े भाई के समान है। हम हमेशा उसके राय के अनुसार ही काम करते हैं। गठबंधन का यह नियम होता है कि बिना किसी सहमति के हम कोई राय नहीं दें। वैसे भाजपा ने हमें आज तक जो भी राजनीतिक राय दी है हमारे लिए पूरी तरह से फायदेमंद रहा है।
यह बात राजनीति के गठबंधन धर्म के पूरी तरह खिलाफ है। अगर वास्तव में राजभर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं तो उन्हें इस मामले में बात जरूर करनी चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि वहां किस बिरादरी की जनसंख्या ज्यादा है।
संजय निषाद
’80 सीटों पर निषाद वोटर निर्णायक भूमिका में’
आगामी चुनाव की रणनीति को लेकर संजय निषाद ने कहा कि पूरे प्रदेश में 80 सीटों पर निषाद समाज के मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। ऐसे में अगर भाजपा हमें जिन सीटों से भी चुनाव लड़ाएगी हम वहां से जीत कर दिखाएंगे। निषाद ने कहा कि कुछ सीटें ऐसी भी रहीं जहां हमारे हार और जीत का अंतर काफी कम रहा। ऐसे में अगर भाजपा हमें उन सीटों पर फिर से मौका देती है तो वहां हम जरूर चुनाव जीतकर दिखाएंगे।
अतरौलिया सीट को लेकर राजभर और निषाद में ठनी
इस बीच, ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पारंपरिक सीट जहूराबाद (गाजीपुर) को छोड़कर आजमगढ़ की अतरौलिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इस पर संजय निषाद ने कहा कि अभी तो सीटों का बंटवारा भी नहीं हुआ है, ना ही किसी सीट को लेकर किसी कोई बातचीत हुई है। फिर भी ओमप्रकाश राजभर ने अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने की बात कही जो ठीक नहीं है।
2022 में निषाद पार्टी के पास थी आजमगढ़ की अतरौलिया सीट
संजय निषाद ने बताया कि 2022 के चुनाव में भाजपा से गठबंधन में अतरौलिया सीट हमारी पार्टी को मिली थी। यहां से हमने प्रशांत सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था,लेकिन वह सपा के संग्राम यादव से हार गए। वह दूसरे नंबर पर रहे। इस हार के बाद भी प्रशांत सिंह इलाके में निषाद पार्टी को मजबूत करने का काम किया है। ऐसे में ओमप्रकाश राजभर का यहां से चुनाव लड़ने की बात कहना पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना है।



