नोएडा एयरपोर्ट ने बदल दी ग्रामीणों की जिंदगी, जहां साइकिल से चलते थे लोग आज घर के बाहर खड़ी हैं SUV

जेवर। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए जमीन देने के बाद जेवर के किसानों की लिविंग स्टाइल में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। महंगी गाड़ियां, कोठी, शहरी सुख सुविधाओं के साथ रहन सहन से जीवन शैली बदल चुकी है।
बड़े किसान पड़ोसी जिलों में बड़ी जमीन खरीद कर जमींदार बन चुके हैं। पड़ोसी जिलों में खरीदी हुई जमीन को लगन पर दे रखा है स्वयं जेवर ग्रेटर नोएडा और आसपास के जिलों में प्रापर्टी के अलावा अलग-अलग कारोबार में हाथ आजमा रहे हैं। हालांकि कुछ किसान ऐसे भी हैं जिन्होंने पैसे का सदुपयोग नहीं किया और खरीदा हुआ घर बार भी बेचकर आज रोड पर आ गए हैं।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए जेवर के रोही, रन्हेरा,पारौही, बनवारीवास, किशोरपुर,दयानतपुर,नगला गणेशी, नगला छीतर, नगला शरीफ खां, दयानतपुर खेड़ा के किसानों से 1334 हेक्टेयर जमीन का वर्ष 2019 में अधिग्रहण किया गया था। रोही,नगला गणेशी, नगला छीतर, नगला शरीफ खां, दयानतपुर खेड़ा गांव का विस्थापन भी किया गया।
दूसरे चरण के लिए दयानतपुर, रन्हेरा, कुरैब, नगला जहानू, नगला हुकमसिंह, बीरमपुर व मुढ़रह की 1181 हेक्टेयर का मुआवजा किसानों को मिल चुका है। जमीन केे मुआवजे से मिली धनराशि के पैसे को ज्यादातर किसानों ने पड़ोसी जिलों में जमीन में निवेश किया और अच्छी खासी जमीनें खरीदकर डाल दीं।
कुछ लोगों ने कृषि को घाटे का सौदा बता प्रॉपर्टी और कारोबार में निवेश किया। लेकिन वहीं कुछ ऐसे भी किसान हैं जिन्होंने पैसे का महंगी गाड़िया, शेयर मार्केट, सट्टा बाजार और अपने शौक पूरे करने में पैसा बर्बाद कर दिया और आज पुश्तैनी प्रापर्टी को बेचने के बाद भी कर्ज में डूब चुके हैं।
रोही निवासी किसान भगवान सिंह की 45 बीघा जमीन का अधिग्रहण हुआ था लगभग 15 करोड़ मुआवजा राशि मिली थी। मुआवजे की रकम से उन्होंने बुलंदशहर की शिकारपुर तहसील में 150 बीघा आम का बाग खरीदा, खुर्जा तहसील में 40 बीघा और अलीगढ़ की गभाना तहसील में 15 बीघा सहित 200 बीघा से अधिक कृषि जमीन के अलावा मकान के मुआवजे से चार मकान बनाए और प्रॉपर्टी के अलावा स्कॉर्पियो गाड़ी, अपना प्रॉपर्टी का कारोबार के साथ ही नोएडा के अच्छे कॉलेजों में बच्चों की पढ़ाई करा रहे हैं।
नगला शरीफ खां निवासी उमरू खां और उनकी पत्नी फजरवी खां की लगभग 90 बीघा जमीन का एयरपोर्ट के प्रथम फेज में अधिग्रहण हुआ। जमीन के मुआवजे से बुलंदशहर के खुर्जा में 135 बीघा और अलीगढ़ के टप्पल के पास लगभग 50 बीघा जमीन खरीदने के साथ ही छह बेटों की विस्थापन टाउनशिप में कोठी व जेवर और टप्पल में प्रापर्टी खरीदने के साथ ही अपने कारोबार शुरू कर चुके हैं।
रोही निवासी किसान तेजपाल सिंह और उनके भाई महिपाल सिंह की लगभग 40-40 बीघा जमीन एयरपोर्ट में गई दोनों ने मुआवजे की धनराशि से बुलंदशहर में 200 बीघा से अधिक जमीन खरीदने के साथ ही शानदार मकान और प्रॉपर्टी खरीदते हुए पैसे का सदुपयोग किया।
रोही के ही किसान ललित को मात्र नौ बीघा जमीन का मुआवजा मिला था जिससे उसने पड़ोसी जिले बुलंदशहर और अलीगढ़ में 20 बीघा से अधिक जमीन और जेवर व आसपास अन्य प्रॉपर्टी खरीदने के साथ ही अपना खुद का कारोबार शुरू किया। महंगी गाड़ी और बच्चों की अच्छी पढ़ाई के अलावा बनवारीवास में शानदार कोठी बनाकर रह रहे हैं।
मुआवजे ने कुछ लोगों को किया बर्बाद
रोही निवासी एक किसान को लगभग चार करोड़ का मुआवजा मिला था। मुआवजे से उसने जमीन, कई महंगी गाड़ियां और जेवरात खरीदे लेकिन पैसे आते ही शेयर मार्केट की लत लग गई और अपना सबकुछ बेचकर गांव के लोगों से कर्ज लेकर गांव छोड़कर फरार हो चुके हैं।
एक किसान को पांच करोड़ रूपये मुआवजा धनराशि मिली । जिससे उन्होंने अलीगढ़ में जमीन खरीदी। जिसका फर्जी बैनामा हो गया। किसान के पैसे भी चले गए और जमीन भी नहीं मिली। जिसके बाद खुर्जा में ओयो चलाया। जिसमें घाटा जाने के बाद सबकुछ बर्बाद हो चुका है।


