अंतर्राष्ट्रीय

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश, वैश्विक हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत

स्वीडन के थिंक टैंक ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (SIPRI) ने दुनियाभर में होने वाले हथियारों के व्यापार पर नई रिपोर्ट जारी कर दी है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया में हथियारों के आयात के मामले में दूसरे स्थान पर बरकरार है। साल 2021 से 2025 के बीच वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल हथियार आयात में भारत की हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत रही है।

रूस पर निर्भरता कम हो रही, लेकिन दबदबा कायम

SIPRI की ‘ट्रेंड्स इन इंटरनेशनल आर्म्स ट्रांसफर्स’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपनी सैन्य जरूरतों के लिए अब भी रूस पर सबसे ज्यादा भरोसा करता है। भारत के कुल हथियार आयात में रूस का हिस्सा 40 प्रतिशत है। हालांकि यह हिस्सेदारी पहले के मुकाबले काफी कम हुई है। 2011-15 में भारत के 70% हथियार रूस से आते थे, जो 2016-20 में गिरकर 51% और अब 40% रह गए हैं। भारत अब रूस के अलावा फ्रांस, इजरायल और अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों से भी बड़े पैमाने पर सैन्य साजो-सामान खरीद रहा है।

यूक्रेन नंबर-1 पर, चीन टॉप-10 से बाहर

रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर कुछ बड़े बदलाव भी देखे गए हैं:

यूक्रेन सबसे बड़ा खरीदार: 2021-25 के दौरान यूक्रेन दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक बन गया है। कुल वैश्विक ट्रांसफर में उसकी हिस्सेदारी 9.7% रही।

चीन की आत्मनिर्भरता: चीन पहली बार टॉप-10 आयातकों की सूची से बाहर हो गया है। इसका कारण उसका घरेलू उत्पादन में तेजी से विस्तार करना है।

पाकिस्तान का हाल: पाकिस्तान के हथियार आयात में 66 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है। उसके कुल आयात का 80% हिस्सा अकेले चीन से आ रहा है।

अमेरिका का वैश्विक दबदबा

दुनिया भर में हथियारों की सप्लाई के मामले में अमेरिका सबसे ऊपर है। अंतरराष्ट्रीय हथियार निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर 42 प्रतिशत हो गई है। एशिया और ओशिनिया क्षेत्र के लिए भी अमेरिका 35% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है।

भारत के लिए ‘आत्मनिर्भरता’ की चुनौती

SIPRI की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है। हालांकि रिपोर्ट बताती है कि 2016-20 और 2021-25 के बीच भारत के आयात में 4 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई है, जो आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों का संकेत है।

SIPRI के अनुसार, एशिया, ओशिनिया और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्धों के कारण वैश्विक स्तर पर हथियारों का कारोबार लगभग 10% बढ़ गया है। भारत के लिए अपनी सीमाओं की सुरक्षा और पड़ोसी देशों की सैन्य तैयारियों को देखते हुए आधुनिक हथियारों का आयात फिलहाल एक मजबूरी और जरूरत दोनों बना हुआ है।

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