जूनियर के अंडर तैनाती मिलने से खफा इंस्पेक्टर ने दिया इस्तीफा, कानपुर पुलिस की ट्रांसफर-पोस्टिंग पर उठे सवाल

कानपुर में अपने से कई साल जूनियर के अंडर में काम करने से आहत इंस्पेक्टर विनय शर्मा ने डीसीपी क्राइम को पत्र देकर दर्द बयां किया है। इसके साथ ही उन्होंने इस्तीफा देने की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि बीते तीन वर्षों से उनकी अनदेखी की जा रही है। काफी परेशान होने के बाद मजबूरी में उन्हें पत्र देकर इस्तीफे की पेशकश करनी पड़ी। इसमें उन्होंने कहा कि ‘जूनियर के अंडर में कैसे काम करूं, इस्तीफा दे दूं क्या’। उधर, अफसरों ने कहा है कि इंस्पेक्टर इस्तीफा देंगे तो मुख्यालय भिजवा दिया जाएगा।
इंस्पेक्टर विनय शर्मा ने बताया कि वर्ष 2023 में वह काकादेव थाने में तैनात थे। उस दौरान नवाबगंज में तैनात दो पुलिसकर्मी बुलेट से एक युवक को उठा ले गए थे। युवक के परिजनों ने पांडुनगर चौकी में तहरीर दी। इसमें एक यू-ट्यूबर का नाम दिया गया था। उन्होंने जांच पड़ताल की तो मामला सुर्खियों में आ गया। इसके बाद उन्हें ललितपुर भेज दिया गया। चार माह बाद उन्हें वापस बुलाया गया लेकिन सप्ताह भर बाद फिर ललितपुर स्थायी तौर पर भेज दिया गया। उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली, जिसके बाद उन्हें बहाल करते हुए लाइन भेज दिया गया। अब साइबर सेल में सात साल जूनियर के अंडर में लगाया गया है।
अपनी इसी व्यथा को उन्होंने पत्र में लिखकर डीसीपी क्राइम को दिया है। इंस्पेक्टर ने कहा कि डीजी सर्कुलर की अनदेखी करके सीनियर को जूनियर के अंडर में लगाया गया है जो गलत है। उन्हें जूनियर का आदेश मानना पड़ता है। मान-सम्मान को दांव पर लगाकर कैसे कोई काम कर सकता है। अपनी समस्या बताते हुए इस्तीफे की अनुमति मांगी है।अपर पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय संकल्प शर्मा ने बताया, इंस्पेक्टर का पत्र मिला है। यह अनुशासनहीनता है। पत्र की जांच कराने के बाद उसकी संस्तुति की जाएगी।
बड़े अफसर को एसी देना है, 55 हजार रुपये दो
वहीं दूसरी ओर सजेती थानाध्यक्ष पर बड़े अफसर को एसी देने के नाम पर 55 हजार रुपये मांगने के आरोप लगे हैं। इस मामले में पुलिस आयुक्त से शिकायत हुई तो उन्होंने एसीपी घाटमपुर को जांच के आदेश दिए हैं। पीड़ित का दावा है कि वह अब तक थाना प्रभारी को ढाई लाख रुपये तक दे चुके हैं। प्रधानी चुनाव लड़ने के चलते पुलिस उन पर दबाव बनाकर रुपये ले रही है। घाटमपुर सजेती निवासी छोटे बाजपेयी अधिवक्ताओं के साथ गुरुवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचे। प्रार्थना पत्र देकर कहा कि वह आगामी जिला पंचायत चुनाव में प्रधान पद का चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसके लिए क्षेत्र में प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।
सजेती थानाध्यक्ष अनुज कुमार भारती अपने हमराह गौरव भदौरिया को घर भेजकर रुपये मंगवाते हैं। वजह पूछने पर कहते हैं कि तुम प्रधानी का चुनाव लड़ने जा रहे हो। थाने के खर्च में हर उम्मीदवार मदद करता है। आरोप लगाया कि दो-तीन बार रुपये ले चुके हैं। मना करने पर जुआ खेलने के जुर्म में अंदर करने की धमकी देते हैं। इसके चलते उन्होंने 20 हजार रुपये भी दिए। आरोप लगाया कि अब तक दो से तीन लाख रुपये ले चुके हैं। इसके बाद फिर थाने बुलाया। न पहुंचने पर 10 जून की सुबह 11:30 बजे दरोगा संजीव कुमार तीन पुलिसकर्मियों के साथ घर पहुंच गए और बड़े भाई चंद्रप्रकाश से अभद्रता करते हुए कहा, छोटे बाजपेयी को थाने भेजो नहीं तो घसीटते हुए ले जाएंगे।
सूचना पर उसी दिन दोपहर 2 बजे वह थाने पहुंचे। जहां उनसे परिवार के सभी सदस्यों और बहनों के नाम पते नोट किए। इसके बाद थानाध्यक्ष अनुज कुमार भारती ने कहा कि 55 हजार रुपये में एसी मिल रहा है। एक बड़े अधिकारी को गिफ्ट देना है। मना करने पर वह साथ लेकर ट्यूबवेल पहुंचे और दोनों कमरों की तलाशी ली। इसके बाद जुआ खेलने की बात स्वीकार कराते हुए वीडियो बनाया और कहा कहीं शिकायत की तो एक टांग पर नचा देंगे। उधर, सजेती थानाध्यक्ष का कहना है कि छोटे बाजपेयी के दोस्त पप्पू समेत तीन लोगों को उनके ट्यूबवेल के पास जुआ खेलते पकड़ा था। 32 हजार रुपये की रिकवरी भी की थी। पुलिस के पास इसके साक्ष्य भी हैं। इसी खुन्नस में छोटे आरोप लगा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल का कहना है कि शिकायतकर्ता आया था। इस मामले की जांच एसीपी घाटमपुर को दी गई है। जांच में भी तथ्य सामने आएंगे, उस आधार पर जांच की जाएगी।



