सीएम योगी ने RSS चीफ मोहन भागवत से की मुलाकात, 30 मिनट तक हुई दोनों के बीच बातचीत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत से भेंट की। निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में हुई इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है। आधे घंटे से अधिक समय तक चली मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री और सरसंघचालक के बीच प्रदेश के सियासी और सामाजिक हालात को लेकर बातचीत हुई। मुख्यमंत्री ने उन्हें मौजूदा राजनैतिक परिदृश्य के साथ ही सरकार के कामकाज की जानकारी दी।
इसके साथ ही संघ के शताब्दी वर्ष में होने वाले कार्यक्रमों व आगामी योजना-रचना को लेकर भी चर्चा होने की खबर है। हालांकि मौजूदा परिदृश्य में इस मुलाकात को काफी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। दरअसल, अगले साल यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं। इधर, संघ प्रमुख की सक्रियता भी यूपी में काफी अधिक है। भागवत गोरखपुर से गत दिवस लखनऊ पहुंचे थे। यहां सद्भाव बैठक, कुटुंब सम्मेलन, युवा संवाद और प्रमुखजन संवाद के बाद देर शाम मुख्यमंत्री से संघ प्रमुख की मुलाकात हुई। इससे पूर्व दोनों के बीच 26 नवंबर को अयोध्या में भेंट हुई थी। तब भी तकरीबन 90 मिनट अकेले में बात हुई थी। गुरुवार को भागवत रवाना होने से पूर्व महानगर के प्रचारकों से भी मिलेंगे।
शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवसाय नहीं हो सकते, सुलभ होने चाहिए: सरसंघचालक
इससे पहले सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित शोधार्थी संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य मूलभूत आवश्यकता है। यह व्यवसाय नहीं हो सकते। शिक्षा और स्वास्थ्य सबके लिए सुलभ होने चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिम के लोगों ने शिक्षा के साथ खिलवाड़ किया। हमारी शिक्षा व्यवस्था हटाकर अपनी थोपी। अंग्रेजों ने जो बिगाड़ा उसको ठीक करना होगा। संघ का कार्य देश को परम वैभव सम्पन्न बनाना है। मैं और मेरा परिवार ही सबकुछ है, यह न सोच कर पूरे देश के लिए सोचना होगा। संघ समाज की एकता और गुणवत्ता की चिंता करता है। संघ को समझना है तो अंदर आकर कर देखिये। संघ को पढ़कर नहीं समझा जा सकता है। संघ को सम्पूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करने वाला एक ही काम करना है। संघ किसी के विरोध में नहीं है। संघ को लोकप्रियता, प्रभाव और शक्ति नहीं चाहिए।
शोधार्थियों को सत्य सामने लाना चाहिए
सरसंघचालक ने कहा कि भारत की दिशा और दशा बदलने में शोध की बड़ी भूमिका है। सत्य परक बातें सामने आनी चाहिए। अज्ञानता से भारत को हम समझ ही नहीं पाएंगे। उन्होने शोधार्थियों से कहा कि जो भी शोध करें, उसे उत्कृष्ट, प्रामाणिकता पूर्वक, तन-मन-धन, निःस्वार्थ भाव से देश के लिए करें। उन्होंने कहा कि संघ को लेकर बहुत दुष्प्रचार होता है। शोधार्थियों को सत्य सामने लाना चाहिए।



