यूपी में सरकारी कर्मचारियों को खुशखबरी, भत्तों में 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी को योगी कैबिनेट की हरी झंडी

उत्तर प्रदेश पुलिस सहित कई विभागों के कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज है। योगी कैबिनेट ने सोमवार को गृह, अधीनस्थ न्यायालयों के कर्मचारियों और अधिकारियों, राज्यपाल-विधानसभा-विधान परिषद सचिवालयों में कर्मचारियों और अधिकारियों के वर्दी व धुलाई भत्ते में इजाफे को मंजूरी दे दी है। इससे सरकार पर 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि वेतन समिति की सिफारिशों में जिन लोगों के भत्तों में संशोधन नहीं हो सका था, उनके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिशों पर कैबिनेट ने अपनी संस्तुति दे दी है। सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि अलग-अलग श्रेणी के अधिकारियों के लिए भत्ते की दरें फर्क हैं। पुराने भत्तों की तुलना में 50 फीसदी तक इजाफा किया गया है। वर्दी, वर्दी नवीनीकरण व वर्दी धुलाई भत्ता बढ़ाया गया है। इसके दायरे में गृह, न्याय विभाग के अधीनस्थ न्यायालयों, कारागार प्रशासन व सुधार विभाग, वन विभाग, आबकारी विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग और आयुष विभाग के उन कर्मचारियों व अधिकारियों को लाभ मिलेगा, जिनके भत्ते वेतन समिति की सिफारिश से संशोधित होने से रह गए थे।
अपर्णा यादव की एनजीओ का बकाया किराया माफ
वहीं इस कैबिनेट बैठक में बी. अवेयर फाउंडेशन का बकाया किराया माफ करने की अनुमति दे दी है। यह एनजीओ सपा संस्थापक रहे मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव की है। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव की यह एनजीओ दिलकुशा कालोनी में ए-2 टाइप-6 आवास आवंटित है। इस पर 27 लाख रुपये बकाया था। कैबिनेट ने यह बकाया माफ कर दिया है। साथ ही भवन आवंटन के नवीनीकरण के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। राज्य के पूर्व मुख्य सचिव आरके तिवारी को पूर्व में आवंटित सरकारी आवासों का बकाया भी माफ करने का फैसला कैबिनेट ने लिया है। इस पर तकरीबन दस लाख रुपये बकाया था।
उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को कैबिनेट की मंजूरी
कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 के साथ उत्तर प्रदेश प्रदेश स्टार्टअप मिशन को भी मंजूरी दे दी गई। नई नीति का उद्देश्य प्रदेश में नवाचार, उद्यमिता और निवेश को बढ़ावा देना, युवाओं के लिए नए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित करना तथा उत्तर प्रदेश को वैश्विक स्तर का मजबूत, समावेशी स्टार्टअप इकोसिस्टम उपलब्ध कराना है। नीति में 100 करोड़ रुपये तक की दीर्घकालिक निवेश का प्रोत्साहन दिया जाएगा। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने नई नीति के तहत स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार (स्केल-अप) तक व्यापक वित्तीय और संस्थागत सहायता देने का प्रावधान किया है। इसके तहत सस्टेनेंस अलाउंस (भरण-पोषण भत्ता) 17,500 रुपये प्रतिमाह (एक वर्ष) से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह (दो वर्ष) कर दिया गया है। वहीं प्रोटोटाइप अनुदान 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये और सीड फंडिंग 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई है। विशेष परिस्थितियों में यह सहायता 50 लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकेगी।



