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विदाई से पहले जनरल द्विवेदी की दो टूक— ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने हमेशा के लिए बदल दिया देश की सुरक्षा का ‘न्यू नॉर्मल’

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत के संकल्प, सैन्य क्षमता और संयम का उत्तम उदाहरण है. यह कार्रवाई सटीक जानकारी, बेहतर समन्वय और स्पष्ट लक्ष्य के साथ की गई. सेना प्रमुख ने आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए बताया कि भारतीय सेना अब अधिक तेज, तकनीकी और समन्वित हो रही है.

रुद्र ब्रिगेड, बाज बटालियन, अश्नि ड्रोन प्लाटून जैसी नई यूनिट्स इसी दिशा में कदम हैं. उन्होंने ड्रोन और ड्रोन-रोधी क्षमताओं को बढ़ाने, अग्निपथ योजना की प्रगति और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिरता बनाए रखने की बात भी कही. जनरल द्विवेदी के अनुसार, भविष्य के युद्ध छोटे, तेज और प्रौद्योगिकी आधारित होंगे, इसलिए सेना पूरी तरह तैयार है.

ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के विरुद्ध भारत की बड़ी सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है. आप इसके महत्व को कैसे देखते हैं?

ऑपरेशन सिंदूर भारत के संकल्प, क्षमता और संयम का स्पष्ट उदाहरण था. यह आतंकवाद के विरुद्ध एक संतुलित और सटीक सैन्य कार्रवाई थी. इसे स्पष्ट उद्देश्य, पुख्ता जानकारी और पूरी तैयारी के साथ अंजाम दिया गया. इस कार्रवाई ने दिखाया कि जब राष्ट्रीय इच्छाशक्ति, सही जानकारी, संयुक्त योजना और सटीक कार्रवाई एक साथ आती हैं, तो निर्णायक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं.

ऑपरेशन सिंदूर केवल सैन्य कार्रवाई नहीं था. इसमें जानकारी जुटाने, निगरानी, वायु शक्ति, सूचना प्रबंधन और सभी स्तरों पर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही. इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि भविष्य के युद्ध छोटे, तीव्र, तकनीक आधारित और सूचना के निरंतर दबाव में लड़े जा सकते हैं.

हाल के अनुभवों के बाद भारतीय सेना अपने बदलाव और आधुनिकीकरण को कैसे आगे बढ़ा रही है?

भारतीय सेना में बदलाव एक सतत प्रक्रिया है. आधुनिकीकरण अब केवल नए हथियार या उपकरण लेने तक सीमित नहीं है. इसका उद्देश्य सेना की सोच, ढांचे, प्रशिक्षण, तकनीक, कार्य प्रणाली और मानव संसाधन को एक साथ आगे बढ़ाना है.

हाल के अनुभवों ने यह स्पष्ट किया है कि भविष्य में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जानकारी, निगरानी, हथियार, संचार व्यवस्था और कमांडर कितनी तेजी से एक साथ काम कर पाते हैं. इसलिए सेना अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने के बजाय अधिक समन्वित और तेज व्यवस्था की ओर बढ़ रही है.

रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, अश्नि ड्रोन प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरियां इसी बदलाव का हिस्सा हैं. इनका उद्देश्य सेना को अधिक तेज, सक्षम, सटीक और तकनीक से जुड़ा बनाना है.

आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका तेजी से बढ़ रही है. भारतीय सेना इन्हें कैसे अपना रही है?

ड्रोन अब केवल निगरानी या विशेष कार्यों के लिए उपयोग होने वाले साधन नहीं रह गए हैं. वे आधुनिक युद्ध क्षेत्र का अहम हिस्सा बन चुके हैं. उनका उपयोग जानकारी जुटाने, निगरानी, लक्ष्य पहचान, सटीक प्रहार, क्षति का आकलन, रसद और सैनिकों की सुरक्षा जैसे कई कार्यों में किया जा रहा है.

भारतीय सेना को अलग-अलग प्रकार के ड्रोन की आवश्यकता है क्योंकि हर ड्रोन की भूमिका अलग होती है. सेना का ध्यान केवल अधिक ड्रोन लेने पर नहीं है. उद्देश्य एक पूरी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें स्वदेशी निर्माण, प्रशिक्षण, रखरखाव, युद्धक सिद्धांत और ड्रोन-रोधी क्षमता शामिल हो.

बाज बटालियन क्या है और यह सेना की ड्रोन क्षमता को कैसे मजबूत करेगी?

बाज बटालियन भारतीय सेना की दूर से संचालित विमान प्रणाली की क्षमता को मजबूत करने की एक महत्वपूर्ण पहल है. इन्हें मौजूदा दूर से संचालित विमान इकाइयों के आधार पर विकसित किया जाएगा. इनमें विशेष रूप से प्रशिक्षित सैनिक और अधिकारी होंगे जो इन प्रणालियों को चलाने और प्रबंधन करने में सक्षम होंगे.

इनका उद्देश्य खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही क्षमता को बढ़ाना है. बाज बटालियन से हवाई निगरानी, युद्धक्षेत्र की लगातार जानकारी और तेज प्रतिक्रिया की क्षमता मजबूत होगी.

बढ़ते ड्रोन खतरे को देखते हुए भारतीय सेना ड्रोन-रोधी क्षमता को कैसे मजबूत कर रही है?

ड्रोन खतरा आधुनिक युद्ध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है. भारतीय सेना ने इस खतरे से निपटने के लिए कई स्तरों पर तैयारी की है. इसमें ड्रोन को पहचानने वाले सेंसर, रडार, कैमरे, जैमर, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और ड्रोन को रोकने वाली प्रणालियां शामिल हैं. विभिन्न सैन्य स्थानों पर ड्रोन और ड्रोन-रोधी केंद्र स्थापित किए गए हैं. इनका उद्देश्य प्रशिक्षण, क्षमता विकास और संचालन में बेहतर तालमेल को बढ़ाना है.

शुरुआती वर्षों के बाद सेना अग्निपथ योजना को कैसे देखती है?

अग्निपथ योजना एक महत्वपूर्ण मानव संसाधन सुधार है. इसका उद्देश्य सेना को अधिक युवा, फिट, ऊर्जावान और भविष्य के लिए तैयार बनाना है. सैन्य इकाइयों से शुरुआती प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है. अग्निवीर यूनिट रूटीन, प्रशिक्षण मानकों और फील्ड आवश्यकताओं के साथ अच्छी तरह तालमेल बना रहे हैं.

ड्रोन, निगरानी प्रणालियों और तकनीकी उपकरणों को समझने की उनकी क्षमता सकारात्मक योगदान दे रही है. यह योजना अभी विकसित हो रही है. सेना प्रशिक्षण के परिणाम, इकाइयों में तालमेल और कमांडरों से मिल रही प्रतिक्रिया का लगातार अध्ययन कर रही है.

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मौजूदा स्थिति को आप कैसे देखते हैं और वहां सेना की प्राथमिकताएं क्या हैं?

उत्तरी सीमाओं पर हाल के समझौतों से जमीन पर स्थिरता बढ़ी है. दोनों पक्ष एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति अधिक संवेदनशीलता दिखा रहे हैं. वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अलग-अलग धारणाओं के कारण कभी-कभी स्थानीय मुद्दे सामने आते हैं  जिन्हें सैन्य स्तर की बातचीत, हॉटलाइन और फ्लैग मीटिंग के माध्यम से सुलझाया जाता है.

सेना की प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं – वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना, स्थानीय मुद्दों को संवाद के जरिए सुलझाना और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए मजबूत तैनाती बनाए रखना.

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