UP चुनाव 2027: एक्शन मोड में सीएम योगी, 3 महीने में किया 43 जिलों का दौरा कर दी 36,877 करोड़ की सौगात

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगातार जिलों के दौरे अब सिर्फ विकास ही नहीं, बल्कि सियासत का भी बड़ा मुद्दा बन गए हैं. बीते तीन महीनों में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 43 जिलों का दौरा कर 36,877 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. मगर, इन दौरों के बीच मुख्यमंत्री का ’80-20′ वाला बयान भी चर्चा में है, जिसे लेकर समाजवादी पार्टी सवाल उठा रही है. सरकार इसे विकास की रफ्तार बता रही है, जबकि विपक्ष इसे 2027 के चुनाव की तैयारी करार दे रहा है. पढ़िए ये खास रिपोर्ट
विकास, विश्वास और लगातार बढ़ते दौरे
बीते तीन महीनों में उत्तर प्रदेश की यही तस्वीर सबसे ज्यादा देखने को मिली. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मई, जून और जुलाई के दौरान प्रदेश के एक छोर से दूसरे छोर तक लगातार जिलों का दौरा करते रहे. कहीं मेडिकल कॉलेज की सौगात मिली, कहीं सड़क और पुलों का लोकार्पण हुआ तो कहीं सिंचाई, शिक्षा, बिजली और औद्योगिक परियोजनाओं की नींव रखी गई. मगर, इन दौरों के बीच मुख्यमंत्री का एक बयान भी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया.
बीते 3 महीने का रिपोर्ट कार्ड
- 43 जिलों का दौरा
- ₹36,877 करोड़ की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास
पिछले दिनों पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि यह चुनाव वैसे भी 80-20 का है. उस लिहाज से मैं जिलों में चार-चार बार हो आऊंगा, जब तक विपक्ष एक बार जाएगा. मुख्यमंत्री के इसी बयान को आधार बनाकर समाजवादी पार्टी अब सरकार पर हमला बोल रही है. सपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री के लगातार दौरे विकास से ज्यादा चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं. वहीं भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी का कहना है कि मुख्यमंत्री का फोकस केवल विकास परियोजनाओं की समीक्षा, समयबद्ध क्रियान्वयन और जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है.
मुख्यमंत्री के दौरे केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहे, बल्कि हर क्षेत्र में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने पर जोर दिखाई दिया. पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड से लेकर अवध और तराई तक लगभग हर क्षेत्र मुख्यमंत्री के दौरे का हिस्सा बना.
मई : गोरखपुर, प्रयागराज, बिजनौर, वाराणसी, देवरिया, महाराजगंज, मऊ और सहारनपुर.
जून : हाथरस, आजमगढ़, अलीगढ़, बलरामपुर, गौतम बुद्ध नगर, पीलीभीत, अयोध्या, देवरिया, गोंडा, फिरोजाबाद, कुशीनगर, महोबा, संत कबीर नगर, उन्नाव, झांसी, हमीरपुर, ललितपुर, वाराणसी, मुरादाबाद और गाजियाबाद.
जुलाई : वाराणसी, बांदा, चित्रकूट, मैनपुरी, अमरोहा, बहराइच, बाराबंकी, बिजनौर, बुलंदशहर, इटावा, कुशीनगर, शामली, प्रतापगढ़, अयोध्या, सुल्तानपुर, बस्ती, आगरा, फतेहपुर, संभल, प्रयागराज, गाजियाबाद और श्रावस्ती.
मुख्यमंत्री के दौरों में सबसे ज्यादा फोकस वाराणसी पर दिखाई दिया, जहां वे चार बार पहुंचे. इसके अलावा देवरिया, बिजनौर, प्रयागराज, अयोध्या, कुशीनगर और गाजियाबाद ऐसे जिले रहे, जहां मुख्यमंत्री ने दो-दो बार जाकर विकास परियोजनाओं की समीक्षा की और नई योजनाओं की सौगात दी.
एक से अधिक बार दौरे वाले जिले
- वाराणसी – 4 बार
- देवरिया – 2 बार
- बिजनौर – 2 बार
- प्रयागराज – 2 बार
- अयोध्या – 2 बार
- कुशीनगर – 2 बार
- गाजियाबाद – 2 बार
सरकार का दावा है कि इन दौरों का मकसद विकास परियोजनाओं की मॉनिटरिंग, अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और योजनाओं को तय समय सीमा में पूरा कराना है. वहीं सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा का कहना है कि ’80-20′ वाले बयान के बाद मुख्यमंत्री के लगातार दौरे साफ तौर पर चुनावी तैयारी का हिस्सा हैं और सरकार विकास के नाम पर राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटी है.
एक तरफ सरकार विकास और सुशासन का दावा कर रही है. दूसरी तरफ विपक्ष इन्हीं दौरों को चुनावी रणनीति बता रहा है. ऐसे में 43 जिलों के दौरे, ₹36,877 करोड़ की परियोजनाएं और ’80-20′ वाले बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में विकास और चुनाव- दोनों की चर्चा साथ-साथ चल रही है. लगातार जिलों के दौरे… हजारों करोड़ की परियोजनाएं… और ’80-20′ वाले बयान पर छिड़ी सियासत…सरकार इसे विकास की रफ्तार बता रही है, जबकि विपक्ष चुनावी तैयारी. अब इन परियोजनाओं का समय पर पूरा होना और जनता तक उनका लाभ पहुंचना ही सबसे बड़ी कसौटी होगी. वहीं राजनीतिक तौर पर भी यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्म रहने के संकेत दे रहा है.



