सहारनपुर में पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 2 लोगों की मौत, दो मजदूर लापता; शरीर के अंग कटकर दूर जा गिरे

सहारनपुर: सहारनपुर के गंगोह थाना क्षेत्र के नया गांव में शुक्रवार को एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हुआ. इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, वहीं दो अन्य लोग लापता बताए जा रहे हैं. सहारनपुर स्थित गंगोह में गाजियाबाद के एक व्यक्ति की पटाखा फैक्ट्री संचालित है. शुक्रवार शाम यहां धमाके के साथ विस्फोट हो गया. सहारनपुर के जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने बताया कि पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट के कारणों की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं. हादसे में मध्य प्रदेश के रहने वाले दीपराज देवड़ा (20 वर्ष) और संदीप देवड़ा (22 वर्ष) की मौत हो गई.
प्रारंभिक जानकारी में दो ठेकेदारों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि दो अन्य मजदूरों की तलाश की जा रही है. फैक्टरी के लाइसेंस, सुरक्षा मानकों और संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कराई जाएगी. दिवाली के चलते यहां बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखी हुई थी. पुलिस हादसे का कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही है. शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है.
दो किलोमीटर दूर तक गूंजी धमाके की आवाज: शाम करीब पांच बजे अचानक ऐसा धमाका हुआ जिसने पूरे इलाके को हिला दिया. विस्फोट की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी और देखते ही देखते फैक्ट्री का एक हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया. दीवारें भरभराकर गिर गईं, छत हवा में उड़ गई और चारों ओर धुएं का घना गुबार छा गया. धमाके की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मजदूरों के शरीर के अंग सैकड़ों मीटर दूर तक जा गिरे.
मौके पर पहुंचे आलाधिकारी: जिसने भी यह मंजर देखा, उसकी रूह कांप उठी. धमाके के बाद फैक्ट्री में चीख-पुकार मच गई और आसपास के ग्रामीण अपनी जान की परवाह किए बिना घटनास्थल की ओर दौड़े. किसी ने आग बुझाने की कोशिश की तो कोई मलबे में दबे लोगों को तलाशने लगा. कुछ ही देर में पुलिस, दमकल, प्रशासन और एंबुलेंस की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं.
मध्य प्रदेश के दो मजदूरों की मौत: राहत और बचाव अभियान शुरू हुआ, लेकिन तब तक दो जिंदगियां हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थीं. हादसे में मध्य प्रदेश के रहने वाले दीपराज देवड़ा (20 वर्ष) और संदीप देवड़ा (22 वर्ष) की दर्दनाक मौत हो गई. दीपराज ठेकेदार के रूप में काम कर रहा था और अपने साथियों के साथ बेहतर रोज़गार की उम्मीद लेकर सहारनपुर आया था. लेकिन किसे पता था कि जिस फैक्ट्री में वह मेहनत कर अपने परिवार के सपने पूरे करना चाहता था, वहीं उसकी जिंदगी का अंत हो जाएगा.
क्षत-विक्षत शव मिले और मलबे में तलाश: सबसे दर्दनाक दृश्य तब सामने आया जब राहत दल को एक शव फैक्ट्री के मलबे में दबा मिला, जबकि दूसरा शव करीब 100 मीटर दूर खेत के किनारे पड़ा मिला. शव इतने क्षत-विक्षत थे कि पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया. चारों तरफ बिखरे शरीर के अंग, खून और मलबे का मंजर हर किसी की आंखें नम कर रहा था. गांव के बुजुर्गों का कहना था कि उन्होंने अपने जीवन में इतना भयावह हादसा कभी नहीं देखा.
दो मजदूर आकाश रावत और लालू पिपराद लापता: हादसे के बाद दो अन्य मजदूर आकाश रावत और लालू पिपराद लापता हैं. प्रशासन को आशंका है कि वे मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं. देर शाम तक जेसीबी मशीनों और राहत टीमों की मदद से मलबा हटाने का काम जारी रहा. हर कोई यही दुआ कर रहा था कि शायद कोई चमत्कार हो जाए, लेकिन समय के साथ उम्मीदें कमजोर पड़ती जा रही थीं.
फैक्ट्री में सुरक्षा पर सवाल: जिस फैक्ट्री में विस्फोट हुआ, वह करीब 10 बीघा क्षेत्र में फैली हुई है. यहां बड़ी संख्या में मजदूर पटाखे बनाने का काम करते थे. बताया जा रहा है कि हादसे के समय कुल 23 मजदूर फैक्ट्री परिसर में मौजूद थे, हालांकि विस्फोट वाले हिस्से में केवल चार लोग काम कर रहे थे. तेज धमाके के कारण बाकी मजदूर किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकल आए.
गांव में मातम, प्रशासनिक जांच शुरू: घटना के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है और फैक्ट्री के बाहर लोगों की भारी भीड़ जमा रही. हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा था—इतना बड़ा हादसा आखिर कैसे हो गया? यदि सुरक्षा के पूरे इंतजाम थे तो विस्फोट इतना भीषण क्यों हुआ? क्या कहीं भारी लापरवाही हुई या फिर नियमों का पालन नहीं किया गया? इन सवालों के जवाब अब विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएंगे.
फैक्ट्री को सील किया गया: जिलाधिकारी अरविंद चौहान ने बताया कि फैक्ट्री का लाइसेंस वर्ष 2028 तक वैध है, लेकिन लाइसेंस होना ही पर्याप्त नहीं है. यह भी जांच की जाएगी कि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा था या नहीं. एसडीएम को जांच के निर्देश दिए गए हैं और यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो कठोर कार्रवाई होगी. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन ने बताया कि फैक्ट्री को सील कर दिया गया है.
फॉरेंसिक टीम और विस्फोटक विशेषज्ञ ने सैंपल लिये: फॉरेंसिक टीम और विस्फोटक विशेषज्ञ घटनास्थल से नमूने जुटा रहे हैं. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विस्फोट किस मुख्य कारण से हुआ. फिलहाल राहत और बचाव कार्य प्राथमिकता पर चल रहा है. यह हादसा केवल दो लोगों की मौत की खबर नहीं है, बल्कि उन परिवारों के टूटे सपनों की कहानी भी है, जिन्होंने अपने बेटों को रोजगार के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजा था.
अपनों का इंतजार, गांव में पसरा सन्नाटा: वे घर से निकले थे अपनों का भविष्य संवारने, लेकिन अब उनके घर लौटेंगी तो सिर्फ उनकी यादें और ताबूत. फैक्ट्री के बाहर पसरा सन्नाटा, मलबे में चल रहा तलाश अभियान और अपनों की राह ताकती आंखें इस हादसे की भयावहता को बयां करने के लिए काफी हैं.



