नोएडा एयरपोर्ट की दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद से होगी ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी; 3,631 करोड़ के बजट को मंजूरी

ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में बने जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक रोड कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसको लेकर योजनाएं तैयार की गई हैं। पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति यानी सीसीईए ने कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। ग्रेटर नोएडा के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक सड़क कनेक्टिविटी के लिए 3630.77 करोड़ रुपये की संशोधित लागत को मंजूरी दी गई है। यह प्रोजेक्ट एयरपोर्ट तक तेज और सीधी पहुंच प्रदान करेगा।
सीसीईए ने जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक 31.42 किलोमीटर सड़क कॉरिडोर के लिए 3630.77 करोड़ की लागत मंजूर की। इस परियोजना में 11 किलोमीटर एलिवेटेड हिस्सा होगा। परियोजना को लेकर हरियाणा सरकार 450 करोड़ रुपये खर्च करेगा। यह प्रोजेक्ट दिल्ली-फरीदाबाद-सोहना से जेवर तक जुड़ेगा। कॉरिडोर को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से लिंक किया जाएगा। फरीदाबाद मास्टर प्लान इलाकों से गुजरते हुए लॉजिस्टिक्स और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।
कॉरिडोर का रूट :
नोएडा एयरपोर्ट कॉरिडोर 31.42 किलोमीटर लंबा होगा। यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना खंड से शुरू होकर जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचेगा। इससे दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे शहरों को सीधा और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मिलेगी।
इस प्रोजेक्ट के करीब 11 किलोमीटर हिस्से को जमीन से ऊपरी हाइवे यान एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में तैयार किया जाएगा। इस ऊपरी खंड की अतिरिक्त लागत 689.24 करोड़ रुपये है। इसमें हरियाणा सरकार 450 करोड़ रुपये देने को राजी हो गई है।
तीन एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी
यह कॉरिडोर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ेगा। इससे ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की क्षमता बढ़ेगी। यह रोड फरीदाबाद मास्टर प्लान 2031 के हाई-डेंसिटी शहरी इलाकों से गुजरेगा। इससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। कनेक्टिविटी मजबूत होने से माल ढुलाई और यात्रा आसान होगी। फरीदाबाद जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
मिल चुका है एयरोड्रम लाइसेंस
जेवर एयरपोर्ट को विमानन नियामक (DGCA) से एयरोड्रम लाइसेंस प्राप्त हो चुका है। अब इसके जल्द संचालन शुरू होने की संभावना है, जिससे यह कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट और भी रणनीतिक बन जाएगा। लाइसेंस मिलने के बाद एयरपोर्ट के ऑपरेशनल होने का रास्ता साफ हो गया है। इससे क्षेत्रीय यातायात और विकास को नई गति मिलेगी। मंगलवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी की टीम ने लखनऊ में अधिकारियों से मुलाकात की है।



