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नोएडा स्काईवाक परियोजना पर सवाल: 42 करोड़ खर्च, लेकिन उपयोगिता पर संशय

नोएडा। जनता के पैसों का दुरुपयोग प्राधिकरण किस प्रकार से करता है। ताजा नमूना सेक्टर-52 दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (ब्लू लाइन मेट्रो) व सेक्टर-51 दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (एक्वा मेट्रो स्टेशन) को आपस में जोड़ने के लिए निर्माणाधीन स्काईवाक के रूप में देखा जा सकता है।

स्काईवाक का निर्माण कार्य अभी तक वर्क सर्किल तीन ने पूरा नहीं किया, लेकिन स्काईवाक डिसमेंटल करने की तिथि (वर्ष 2029) नजदीक आ गई है।

बता दें कि सेक्टर-51 व 52 के बीच खाली पड़ी जमीन पर आइकिया शापिंग माल का निर्माण चल रहा है। इस शापिंग माल की अनुबंध शर्त में दोनों सेक्टरों के बीच संचालित मेट्रो को आपस में जोड़ने की योजना शामिल रही। अनुबंध के अनुसार वर्ष 2029 में शापिंग माल बनकर तैयार हो जाएगा।

400 से 200 मीटर की हो जाएगी दूरी

इसके बाद यहां पर शापिंग मॉल के दोनों ओर मेट्रो स्टेशनों को एस्केलेटर से जोड़ दिया जाएगा। इससे एक्वा व ब्लू लाइन मेट्रो के बीच की दूरी घटकर 400 मीटर से 200 मीटर रह जाएगी। इसके बाद स्काईवाक की उपयोगिता खत्म हो जाएगी, डिसमेंटल करने की बात शामिल है।

हालांकि शांपिंग माल को निर्माण कार्य धीमा है, वर्ष 2035 में पूरा होने संभावना है। सवाल यह है कि दोनों मेट्रो स्टेशन पर उतरने वाली सवारियों को सहूलियत देने के लिए नोएडा प्राधिकरण व एनएमआरसी संयुक्त रूप से निर्णय लेकर स्काईवाक का निर्माण कराया है। इस पर अबतक 42 करोड़ रुपये खर्च हो चुके है।

स्काईवाक शुरू करने से पहले अस्थाई सुविधा के लिए दो करोड़ खर्च कर प्राधिकरण ने वाकवे बनाया था। यह निर्णय भी तत्कालीन सीईओ व एनएमआरसी एमडी रितु माहेश्वरी ने लिया था, जिसे ध्वस्त कर दिया गया।

अब इस योजना को लेकर सवाल खड़ा हो गया कि आइआइटी से ग्रहन परीक्षण कराने के बाद भी यह दिक्कत उस समय क्यों नहीं इंजीनियरों को दिखाई दी, जब इसका निर्माण शुरू कराया गया था।

सवारियों को नहीं उतारा जा सकता

आज परियोजना पूरी होने के बाद सेक्टर-51 में सेक्टर-52 मेट्रो से आने वाली सवारी को उतारा ही नहीं जा सकता है, क्योंकि जहां पर दीवार को तोड़कर स्काईवाक को उतारने की जगह एनएमआरसी ने दी, उस जगह पर दीवार आ गई, दीवार को तोड़ा गया तो बीच में बीम फंस गई।

स्ट्रक्चर टेस्टिंग कर बीम को हटाने कितना सही हेागा, जबकि इस स्काईवाक को लेकर एनओसी देने से पहले ही अग्निशमन विभाग मना कर चुका है, क्योंकि यहां पर सुरक्षा इंतजाम नाकाफी है।

हालांकि नवंबर 2025 में 18 लाख रुपये प्राधिकरण को एनएमआरसी दे दिया था, जिसमें बीम को शिफ्ट करना था। इसको लेकर एनएमआरसी के तत्कालीन कार्यकारी निदेशक महेंद्र प्रसाद ने आठ बैठके की, लेकिन यह काम आज तक शुरू नहीं हो सका।

10 मार्च से पहले उद्घाटन के आदेश

अब प्राधिकरण सीईओ कृष्णा करुणेश ने 10 मार्च से पहले स्काईवाक का उद्घाटन कराने को सिविल विभाग से कहा दिया है, लेकिन इस समय सीमा पर भी संशय के बादल मंडराने लगे है, क्योंकि स्काईवाक का निर्माण जून 2023 में शुरू हुआ था। इसे महज पांच महीने में पूरा किया जाना था, लेकिन अब तक काम अधूरा है।

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