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उद्योग लगाने में आनाकानी करने वालों पर YEIDA की गाज, 39 प्लॉट का आवंटन रद

ग्रेटर नोएडा में यमुना विकास प्राधिकरण (यीडा) ने रजिस्ट्री नहीं कराने वाले 39 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन बुधवार को निरस्त कर दिया। इन आवंटियों को रजिस्ट्री के लिए कई बार नोटिस जारी किए जा चुके, लेकिन उन्होंने प्राधिकरण के नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। प्राधिकरण मार्च 2026 तक इन आवंटियों द्वारा जमा की गई भूखंडों की राशि में 25 प्रतिशत हिस्सा काटकर वापस कर देगा। भूखंड के निरस्तीकरण का पत्र जल्द ही आवंटियों को भेजा जाएगा।

366 औद्योगिक भूखंडों के आवंटियों को नोटिस

प्राधिकरण के अधिकारी ने बताया कि यमुना सिटी में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने समेत भूखंडों की स्थिति पर 21 नवंबर को अपर मुख्यसचिव आलोक कुमार की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। बैठक में निर्णय लेने के बाद प्राधिकरण ने सेक्टर-29, 32, 33 के करीब 366 औद्योगिक भूखंडों के आवंटियों को नोटिस जारी किए गए थे।

चेक लिस्ट के बाद भी नहीं कराई रजिस्ट्री

इन सभी भूखंडों का आंवटन वर्ष 2013 से 2020 के बीच हुआ है। इन आवंटियों ने चेक लिस्ट जारी होने के 60 दिनों के बावजूद भूखंडों की रजिस्ट्री नहीं कराई। प्राधिकरण ने नोटिस जारी कर इन्हें 10 दिनों में रजिस्ट्री कराने का समय दिया, लेकिन नोटिस के जवाब में सिर्फ 76 आवंटियों ने रजिस्ट्री कराई, जबकि 58 आवंटियों ने जवाब देते हुए रजिस्ट्री को लेकर प्रक्रिया को शुरू कर दिया।

रजिस्ट्री न कराने के पीछे क्या वजह?

इनमें 48 आवंटी ऐसे हैं, जिन्होंने रजिस्ट्री न कराने के पीछे भूमि विवाद, जीरो पीरियड समेत अन्य कारण बताए, लेकिन 130 आवंटियों ने न प्राधिकरण के नोटिस का जवाब दिया और न ही दस्तावेज जमा कराए। अब प्राधिकरण ने इन 130 आवंटियों में से बुधवार को 39 का आवंटन निरस्त कर दिया।

91 और पर ऐक्शन की तलवार

यमुना विकास प्राधिकरण क्षेत्र के औद्योगिक सेक्टरों में अब भी 91 आवंटियों पर कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। इन आवंटियों ने यदि जल्द ही प्राधिकरण के नोटिस का जवाब नहीं दिया और न ही रजिस्ट्री कराई तो इनके भी भूखंडों का आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा।

नोटिस भेजने की तैयारी

प्राधिकरण ने अभी से ही आवंटियों के कोर्ट जाने समेत शासन स्तर पर शिकायत मामले को लेकर भी अपनी तैयारी कर ली है। निरस्त भूखंडों के आवंटियों को राशि वापस करने के लिए जो भी नोटिस जारी किए गए है, उनके नोटिस में आवंटन की तिथि, जमा राशि, चेक लिस्ट जारी होने का समय, रजिस्ट्री लंबित होने की अवधि, शहर के निवेश व रोजगार पर असर और अन्य कई तर्कों के साथ नोटिस भेजने की तैयारी की है।

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