YEIDA ने जमीन की पूरी कीमत वसूली, फिर भी 363 उद्यमी छह साल से कर रहे कब्जे का इंतजार

ग्रेटर नोएडा। औद्योगिक भूखंडों के लिए यमुना प्राधिकरण (यीडा) के आवंटियों का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। भूखंड की पूरी कीमत चुकाने के बावजूद प्राधिकरण आवंटियों को यह स्पष्ट नहीं कर पा रहा है कि उन्हें भूखंड पर कब्जा आखिर कब मिलेगा। जिन जमीनों पर भूखंड नियोजित किए गए हैं, उनमें से कुछ अब भी यीडा के कब्जे में नहीं हैं। वहीं, कुछ जमीन रसूखदारों के कब्जे में होने के कारण प्राधिकरण के लिए चुनौती बनी हुई है।
भूखंड मिलने की उम्मीद में उद्यमी लगातार इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर, औद्योगिक इकाई स्थापित करने या उसका विस्तार करने के लिए उन्हें किराये के परिसर का सहारा लेना पड़ रहा है। साथ ही, आवंटित भूखंड के लिए लिए गए ऋण की ईएमआई और ब्याज भी चुकाना पड़ रहा है। इससे उद्यमियों पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
2020 में आवंटित किए गए थे औद्योगिक भूखंड
यमुना प्राधिकरण अब तक 3,189 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन कर चुका है। इनमें से 2,826 भूखंड ही नियोजित हो पाए हैं, जबकि 363 भूखंडों के लिए प्राधिकरण अब तक जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कर पाया है। खास बात यह है कि इन भूखंडों की पूरी कीमत आवंटियों से वसूली जा चुकी है।
औद्योगिक सेक्टर-29 के एम ब्लॉक में उद्यमियों को वर्ष 2020 में औद्योगिक भूखंड आवंटित किए गए थे। वर्ष 2025 तक आवंटियों ने भूखंड की पूरी कीमत प्राधिकरण को चुका दी, लेकिन छह साल बीतने के बाद भी उन्हें भूखंड पर कब्जा नहीं मिल पाया है। फिलहाल उन्हें जल्द कब्जा मिलने की स्पष्ट उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है।
किराया, ईएमआई और ब्याज से बढ़ रहा आर्थिक बोझ
आवंटियों का कहना है कि भूखंड मिलने में हो रही देरी के कारण उद्यमियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कई उद्यमी किराये के परिसर में अपनी औद्योगिक इकाइयां संचालित कर रहे हैं। दूसरी ओर, आवंटित भूखंड के लिए लिए गए ऋण की ईएमआई और ब्याज का भुगतान भी लगातार करना पड़ रहा है।
किराया, ऋण की किस्त और ब्याज के साथ-साथ भूखंड में फंसी पूंजी की लागत वहन करने से उद्यमियों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है। उद्यमियों का कहना है कि वे कई बार अधिकारियों से संपर्क कर भूखंड की स्थिति और कब्जा मिलने की समय-सीमा के बारे में स्पष्ट जानकारी मांग चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक ठोस जवाब नहीं मिला है।
छोटे उद्यमियों ने मांगी स्पष्ट समय-सीमा
उद्यमियों की मांग है कि प्राधिकरण उन्हें विकास कार्य पूरा करने और भूखंड पर कब्जा देने की स्पष्ट समय-सीमा बताए। साथ ही, प्रत्येक भूखंड की मौजूदा स्थिति की पारदर्शी जानकारी भी आवंटियों को दी जाए, ताकि वे अपने कारोबार और निवेश से जुड़ी योजनाएं तय कर सकें।
उद्यमियों का आरोप है कि प्राधिकरण बड़े निवेश और बड़ी परियोजनाओं पर अधिक जोर दे रहा है, जबकि छोटे उद्यमी लंबे समय से अपने भूखंड का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि समय पर भूखंड न मिलने से छोटे उद्यमियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जमीन उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिकता से होगी कार्रवाई
यीडा के एसीईओ शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि हाल ही में बैठक कर समीक्षा की गई है कि कितने औद्योगिक भूखंड अभी नियोजित होने से शेष हैं और उनके लिए जमीन की उपलब्धता की स्थिति क्या है।
उन्होंने बताया कि शेष भूखंडों के लिए प्राथमिकता के आधार पर जमीन खरीदकर उन्हें विकसित करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। संबंधित विभागों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जा चुके हैं।



